मणिराम दास की छावनी में संचालित श्रीराम कथा महोत्सव में पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण इसी साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने कथा श्रोताओं को मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक की पूरी कहानी बताई। चंपत राय के अनुसार 22 जनवरी 2024 को हुई रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से 18 माह में छह करोड़ से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

चंपत राय ने बताया कि मंदिर वास्तुकला एवं तकनीक का संगम है। मंदिर एक हजार साल तक खड़ा रहे, इसके लिए कई कंपनियों की मदद ली गई है। मंदिर में एक प्रतिशत भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर की नींव पत्थरों की चट्टान पर निर्मित है। जमीन में वर्षा की नमी पत्थरों को नुकसान न पहुंचा पाए इसलिए नमी सोखने वाले ग्रेनाइट पत्थर का नींव में इस्तेमाल किया गया है।

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मंदिर के दरवाजे सदियों तक चमकते रहें इसके लिए सागौन की लकड़ियों का इस्तेमाल किया गया है। रामलला की मूर्ति कैसी हो इसको लेकर देश के नामी मूर्तिकारों के साथ मंथन किया गया। तीन मूर्तिकारों ने मूर्ति बनाई थी, जिसमें से एक मूर्ति का चयन हुआ, जो आज राम मंदिर के भूतल पर स्थापित है। प्रथम तल पर राम दरबार की भी स्थापना हो चुकी है।

परकोटा में छह मंदिर, सप्त मंडपम में सात मंदिर बनाए गए हैं। राम जन्मभूमि परिसर भविष्य में सामाजिक समरसता का भी बड़ा केंद्र बनकर सामने आएगा। कहा कि इस समय एक घंटे में सुविधापूर्वक रामलला के दर्शन हो रहे हैं। कथा क्रम में उत्तम स्वामी ने प्रवचन की सरिता प्रवाहित की।



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