किनारी बाजार में चांदी गलाने के कारखाने माैत को दावत रहे हैं। नियमों को ताक पर रख दिया गया है। संचालकों को न नियमों की परवाह है और न ही जान जाने का भय है। जिस कारखाने में विस्फोट हुआ, उसमें भूतल से जाने के लिए एक फुट की सीढ़ियां बनी हुई थीं। भूतल पर टंच की दुकान चल रही थी। दूसरी मंजिल पर कारखाने में भट्ठी चलाने के लिए 4 से अधिक एलपीजी के कामर्शियल सिलिंडर रखे हुए थे। इतना ही नहीं तीसरी मंजिल पर गोदाम में भी 3 सिलिंडर रखे मिले हैं।
कोतवाली स्थित किनारी बाजार, जाैहरी बाजार, नमक की मंडी में एक हजार से अधिक सराफा की दुकानें हैं। इनके साथ ही 100 से अधिक कारखाने संचालित हो रहे हैं। बाजारों में सुबह से ही भीड़ की वजह से चार और दोपहिया वाहन तो दूर पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बाजार में कई मार्केट ऐसे हैं, जिनमें 10 से 15 फीट की दुकानें हैं। इनमें जाने के लिए छोटी सीढि़यां ही हैं। आने-जाने के लिए भी संकरे रास्ते हैं। इनमें ही चांदी कारखाने खोले हुए हैं।

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Cylinder exploded in agra market
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चांदी कारखानों को चलाने के लिए नियमों की अनदेखी की जा रही है। मृतक सुनील पाटिल के कारखाने और ऊपर के गोदाम में पुलिस को 7 कामर्शियल सिलिंडर मिले। इनमें 4 दूसरी मंजिल पर कारखाने तो 3 तीसरी मंजिल पर बने गोदाम में रखे हुए थे। इनमें ज्यादातर भरे हुए थे।

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– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीएफओ देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि छोटे कारखानों के लिए फायर एनओसी की बाध्यता नहीं है। फिर भी विभाग को जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे निरीक्षण किया जा सके। नियमों की अनदेखी करके कारखाने चलाए जा रहे हैं। जहां भी भट्ठी लगाई जा रही है, वहां पर सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए। अग्निशमन यंत्र होने चाहिए। मगर, इस घटनास्थल पर कोई अग्निशमन यंत्र नहीं मिला।

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– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
व्यापारी लेकर आए अग्निशमन यंत्र
कारखाने में आग लगने की घटना के बाद कुछ व्यापारी आ गए। वह अपने साथ अग्निशमन यंत्र भी लेकर आए। इनसे आग बुझाने के प्रयास किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में दकमल कर्मी आए।

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– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंस्पेक्टर कोतवाली ने दिखाई तत्परता
इंस्पेक्टर कोतवाली धर्मेंद्र कुमार ने घायलों को निकलवाने में तत्परता दिखाई। वह दमकलकर्मियों के साथ खुद ही खिड़की के पास सीढ़ी लगाकर चढ़ गए। उन्होंने खिड़कियों को खुलवाया।
