रायबरेली। जिले में डेंगू, एईएस के साथ स्क्रब टाइफस की भी चपेट में आकर लोग बीमार हो रहे हैं। जांच में हुई पुष्टि के बाद बच्चों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांवों में पहुंचकर परिवार के लोगों की सेहत जांची। दवा का छिड़काव भी किया गया है।
जिला अस्पताल की प्रयोगशाला की जांच में अमर नगर निवासी रौनक (6), लालगंज के अंबारा पश्चिम गांव निवासी नैनसी (10), डीह के टेकारी दांदू निवासी रुद्र कुमार (6), राही ब्लॉक के रुस्तमपुर निवासी जानवी (2), दीनशाह गौरा के इस्माइलमऊ निवासी हिमांशू (4) और सरेनी के काशीखेड़ा निवासी माही (3) स्क्रब टाइफस की चपेट में आए हैं। इन बच्चों को बुखार व अन्य लक्षण होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जांच में एईएस के साथ ही बच्चों में स्क्रब टाइफस की भी पुष्टि हुई। रिपोर्ट के बाद टीमों ने मरीजों के घरों में पहुंचकर परिवार के लोगों की सेहत जांची। जांच के लिए ब्लड के सैंपल भरे। गांवों में दवा के छिड़काव के साथ ही लोगों को मच्छरों से बचने की सलाह दी।
104 डिग्री तक होता बुखार
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. गौरव त्रिवेदी ने बताया कि झाड़ियों में जुएं के आकार के रहने वाले रिकेटसिया कीट (पिस्सुओं) के काटने से स्क्रब टाइफस चमड़ी के सहारे शरीर में प्रवेश करता है। जिस स्थान पर यह कीट काटता है। शरीर के उस स्थान पर फफोले नुमा काली पपड़ी पड़ जाती है।
स्क्रब टाइफस की चपेट में आने से बुखार 104 डिग्री तक हो जाता है। शरीर में दर्द, ऐंठन व अकड़न हो जाती है। हाथ, गर्दन में गिल्टियां हो जाती हैं। डेंगू की तरह ही इस रोग से पीडि़त व्यक्ति में प्लेटलेट्स गिरती हैं। यह संक्रामक रोग नहीं है। जोड़ों में असहनीय दर्द होता है।
बच्चा वार्ड में बढ़े मरीज, ओपीडी में आए 1820 रोगी
जिले में संक्रामक रोगों के बढ़ने का असर दिख रहा है। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पीडियाट्रिक आईसीयू के बेड फुल हो गए हैं। अन्य वार्डों में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मंगलवार को ओपीडी में 1820 लोग इलाज कराने के लिए पहुंचे। पर्चा काउंटर के साथ ही पैथोलॉजी में लंबी लाइन देखने को मिली। ओपीडी कक्षों के बाहर सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। दवा काउंटर पर दवाओं के लिए मरीजों ने पसीना बहाया। कई मरीजों को सारी दवाएं भी नहीं मिली।
मौसम में बदलाव और मच्छरों की संख्या बढ़ने के कारण मरीज बढ़े हैं। वार्डों और ओपीडी कक्षों में इलाज के लिए पर्याप्त बंदोबस्त हैं। पैथोलॉजी में आने वाले मरीजों की जांच कराकर तत्काल रिपोर्ट दी जाती है, जिससे समय से मरीजों का इलाज शुरू हो रहा है।
– डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
