इटावा। स्मार्ट मीटर की तेज रफ्तार और ऑटो कट जैसी तकनीकी खामियों से परेशान बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। जिले में अब नए स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। ऊर्जा मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधीक्षण अभियंता को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। शासन ने यह फैसला स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के भारी विरोध और तकनीकी शिकायतों के बाद लिया है।
जिले में कुल दो लाख आठ हजार उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। वर्ष 2024 में शुरू हुए इस अभियान के तहत तमाम विरोध के बावजूद अब तक लगभग 27 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से सबसे अधिक 17 हजार मीटर शहर में और शेष ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं। शासन के इस आदेश से जिले के 1.81 लाख बिजली उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है।
मीटरों के तेज चलने और बिल माइनस में जाते ही बिजली गुल होने (ऑटो कट) की समस्या से उपभोक्ता खासे नाराज थे। जनता के बढ़ते आक्रोश का संज्ञान लेते हुए शासन ने फिलहाल नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है। निर्देश दिए गए हैं कि अब तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अगला निर्णय लिया जाएगा। एक्सईएन प्रथम हनुमान प्रसाद मिश्रा ने बताया कि जब तक उपभोक्ता पूरी तरह संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक नए स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। संबंधित कंपनियों को मौजूदा कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
27 हजार स्मार्ट मीटरों में लगभग 12 हजार मीटर प्रीपेड कर दिए गए हैं। इन उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर यह है कि अब बिल जमा करने के बाद घंटों इंतजार नहीं करना होगा। पुरानी व्यवस्था के तहत बिल अदायगी के बाद आपूर्ति बहाल होने में दो से चार घंटे लगते थे। लेकिन नई व्यवस्था में ऐसी तकनीकी प्रणाली विकसित की जा रही है जिससे बिल जमा होते ही कुछ ही मिनटों में बिजली चालू हो जाएगी।
जिन घरों में पहले से स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, वहां फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी। मीटर हटाने को लेकर अभी तक शासन या निगम की ओर से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही बिल का भुगतान करना होगा। हालांकि, विभाग का दावा है कि लगे हुए मीटरों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
अग्रिम आदेशों तक नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। प्राथमिकता उपभोक्ताओं की समस्याओं को दूर करने की है। जो मीटर लग चुके हैं, उनमें तकनीकी सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
ऋषभ देव, अधीक्षण अभियंता
