State Consumer Commission's decision: Finance company snatched the car for non-payment of two installments, no

राज्य उपभोक्ता आयोग
– फोटो : Demo pic

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कोरोना काल में उपभोक्ता द्वारा दो किस्त न चुका पाने पर फाइनेंस कंपनी द्वारा गाड़ी छीनकर बेच देने के मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने सख्त आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने पीड़ित को नई गाड़ी देने के अलावा 5.50 लाख रुपये मानसिक कष्ट व खर्च के रूप में देने का फैसला सुनाया है।

अकबरपुर (कानपुर देहात) के सुरेंद्र सिंह ने कानपुर नगर स्थित चोला मंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से 13 नवंबर 2020 को एक वाणिज्यिक वाहन के लिए 6.75 लाख रुपये फाइनेंस कराया था। सितंबर 2021 तक उन्होंने करीब 2.14 लाख रुपये कंपनी को दिए। कोरोना काल में दो किस्त वह नहीं दे सके।

इस पर 7 नवंबर 2021 को फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने गाड़ी छीन ली और बाद में बेच दी। जबकि नियमत: तीन किस्तें अदा न करने पर ऋण लेने वाले को डिफाल्टर माना जाता है। इसके बाद नोटिस दी जाती है। पर, इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया।

सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने कहा कि कोरोना काल में केंद्र ने भी लोन संबंधी नियमों में ढील देने के निर्देश दिए थे। ऐसे में मात्र दो किस्तें चुका न पाने की वजह से गाड़ी छीन कर बेच देना अमानवीय है। आयोग ने फाइनेंस कंपनी को आदेश दिया कि पीड़ित को नया वाहन दे, जिसकी कोई किस्त नहीं ली जाएगी। अगर पीड़ित वाहन लेने का इच्छुक नहीं है तो कंपनी उसे आठ लाख रुपये दे। इसके अतिरिक्त पांच लाख रुपये मानसिक कष्ट और पचास हजार रुपये वाद खर्च के रूप में भी कंपनी को देने का आदेश दिया।



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