संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Sat, 04 Jul 2026 02:43 AM IST


The builder will have to refund the amount deposited for the flat, along with interest.



आगरा। रुपये लेने के बाद भी बिल्डर फ्लैट नहीं दिया। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष आशुतोष और सदस्य पारुल काैशिक ने बिल्डर से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 47.25 लाख रुपये दिलाने के आदेश दे दिए। साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में एक लाख रुपये अलग से अदा करने होंगे।


न्यू आगरा निवासी राजवीर सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आयोग में वाद दायर किया था। आरोप लगाया कि उनकी मां द्राैपदी देवी ने अपने जीवन काल में एनआईआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से कामायनी हॉस्पिटल सिकंदरा के नजदीक स्थित द फ्लोरेंस प्लेटिनम बिल्डिंग में 4 बीएचके का फ्लैट सितंबर 2012 में बुक कराया था। विपक्षी ने फ्लैट का निर्माण कराकर 36 माह में कब्जा देने का वायदा किया। मां ने कब्जा लेने से पहले ही फ्लैट की कीमत के रूप में विपक्षी बिल्डर को 52.25 लाख रुपये अदा कर दिए। 22 सितंबर 2016 को मां मृत्यु हो गई। परिजन की आपसी सहमति से हुए बंटवारे में फ्लैट उनके हक में आया, पर विपक्षी बिल्डर न फ्लैट दिया न रुपये वापस किए। दबाव डालने पर 5 लाख रुपये दिए थे।



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