
शहर के बाजारों में जगमगा रहीं झालरें।
लखनऊ। दिवाली से पहले ही शहर में झालरों, सजावटी लैंप व आकर्षक लाइटों का कारोबार जगमग हो गया है। बाजार में इस बार चीन की झालरों संग भारतीय झालर भी डिमांड में हैं। जबकि, कई तरह के सजावटी लैंप, हैंगिंग और फ्लोर लैंप की भी मांग है। उधर, दिवाली से जुड़े तमाम तरह के चाइनीज पटाखे भी बाजार में हैं।
शहर के लाटूश रोड व नाका स्थित प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में दुकानों के बाहर टंगी रंग-बिरंगी झालरें त्योहारी सीजन का अहसास कराती हैं। खास बात यह कि कभी सिर्फ चाइनीज झालरों से पटे रहने वाले इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में अब भारतीय झालरों की भी आधी हिस्सेदारी है। झालरों व लाइटों वाली स्ट्रिप के कारोबार से जुड़े व्यापारी बताते हैं कि एक बार खराब होने के बाद इस्तेमाल न हो पाने पर चीनी झालरों का बाजार इस बार गिरा है।
वहीं, देसी झालरों की रिपेयरिंग भी हो सकती है। लाटूश रोड के दुकानदार प्रेम अग्रवाल बताते हैं कि मार्केट में 15-20 फीसदी की गिरावट है। इस बार रेट सस्ते हैं क्योंकि तारों में कॉपर की जगह एल्युमिनियम का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए 20-25 रुपया प्रति पैकेट मार्केट सस्ता है। 10 मीटर देसी झालर 40 तो 12 मीटर चीनी झालर 50 रुपये तक मिलती है।
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दिल्ली के तार, चीन के बल्ब और गुजराती कैप से तैयार हो रही झालर
कारोबारी प्रेम अग्रवाल बताते हैं कि चीनी झालरों को टक्कर देने के लिए दिल्ली का तार, चीन का बल्ब और अहमदाबाद के कैप का इस्तेमाल कर देसी झालर तैयार की जा रही है। इसमें एलईडी बल्ब चीन से तो बल्ब की कैप अहमदाबाद से आती है, जबकि तार दिल्ली से। कानपुर में इसे असेंबल किया जाता है। वहीं, झालरों के कारोबार से जुड़े शिबू बताते हैं कि बाजार में कई तरह की झालरें हैं, इनमें गुजराती झालर में ज्यादा चमक है। मल्टी पिक्सल व एलईडी झालरों की नई वैरायटी है। लंबाई के हिसाब से भारतीय झालर चीनी झालर के मुकाबले सस्ती पड़ती है।
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रंग-बिरंगी सीलिंग लाइटों व लैंप की भी मांग
रंग-बिरंगी लाइटों के उपकरणों का कारोबार करने वाले सुधीर सिंह बताते हैं कि नवरात्र बीतने के बाद बाजार चढ़ेगा। मुख्य रूप से सजावटी लैंप, सीलिंग लैंप व फ्लोर लैंप ज्यादा बिकते हैं। इनकी कीमत 800 से 2000 रुपये तक है। कुछ लोग सीलिंग झूमर व झालरनुमा झूमरों को खरीदने में रुचि दिखाते हैं। यह 10 हजार की ऊपर की रेंज के होते हैं।
