हर वर्ष 27 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर जिले का रंगमंच परिदृश्य भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। ओटीटी और वेब सीरीज के बढ़ते प्रभाव के बावजूद झांसी में रंगमंच के प्रति कलाकारों का जुनून और लगाव आज भी कायम है।

जनपद में करीब सात रंगमंच सक्रिय हैं, जिनसे 250 से अधिक कलाकार जुड़े हुए हैं। ये कलाकार न सिर्फ अपनी कला को जीवंत बनाए हुए हैं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर नुक्कड़ नाटक और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को जागरूक भी कर रहे हैं।

रंगमंच को अभिनय की पहली पाठशाला माना जाता है। यहां से कलाकार अपने कॅरिअर की शुरुआत कर अभिनय की बारीकियां सीखते हैं। जिले के कई कलाकार रंगमंच से निकलकर बड़े पर्दे और टीवी इंडस्ट्री तक पहुंचे हैं। हाल ही में ओरछा में शूट हुई फिल्म ‘अलीबाबा और अस्सी भूत’ में करीब 80 स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया, जो जिले के रंगमंच की ताकत को दर्शाता है।

इसके अलावा कई कलाकार मुंबई में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी नए कलाकारों को रंगमंच से जुड़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।

रंगमंच कलाकारों की जुबानी

रंगमंच से ही अभिनय का हुनर सीखा। इस मंच ने कई विधाएं सिखाईं। जल्द ही छोटे पर्दे पर ‘फूलन देवी’ फिल्म रिलीज होगी।– देवदत्त बुधौलिया

पिछले 10 वर्षों से रंगमंच से जुड़ी हूं। नुक्कड़ नाटकों के जरिये अपनी प्रतिभा को निखारा और अब बॉलीवुड में काम करने का मौका मिला। – अनुराधा देवी

बड़े पर्दे पर काम करने का सपना था, जिसे पूरा करने के लिए रंगमंच को चुना। यहीं से निखार मिला और शूटिंग का अवसर मिला। – अजीम शेख

नए कलाकारों को हमेशा रंगमंच से शुरुआत करने के लिए प्रेरित करता हूं। यही मंच उन्हें खुद को बेहतर बनाने का मौका देता है। – रत्नेश लिटोरिया



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