संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। सोमवार को दैलवारा-ललितपुर में हादसाग्रस्त होने से बची केरल एक्सप्रेस के मामले में अब अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। यहां ब्लॉक का समय समाप्त हो जाने के बाद भी काम किया जाता रहा जिसकी जानकारी सीनियर सेक्शन इंजीनियरों के अलावा किसी को नहीं थी। यही कारण रहा कि ट्रेन टूटी पटरी तक आ पहुंची। इस मामले में बुधवार को जांच अधिकारियों ने एसएसई और ट्रैक मेंटेनरों के बयान भी दर्ज कराए।
भोपाल से चली केरल एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 10 घंटे की देरी से चल रही थी। ऐसे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने दैलवारा-ललितपुर रेलमार्ग पर दूसरी ट्रेन न होने के चलते इंजीनियरिंग विभाग से ट्रैक की वेल्डिंग और फिश प्लेट बदलने को लेकर रेलखंड में सोमवार की दोपहर 1.40 बजे से लेकर 3.10 बजे तक डेढ़ घंटे का ट्रैफिक ब्लॉक मांगा था। रेलवे की ओर से ब्लॉक मंजूरी होने के बाद सेक्शन इंजीनियर पाथ-वे स्कंद भटनागर ने यहां पटरी पर वेल्डिंग और फिश प्लेट बदलने का काम शुरू करा दिया।
यह काम निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सका। इसके बाद विभाग से फिर ब्लॉक मांगा गया, लेकिन ब्लॉक बढ़ाया नहीं जा सका। यहां ब्लॉक न होने के बाद भी रेलकर्मी काम करते रहे और कार्य स्थल से 650 मीटर पहले पटरी पर बैनर फ्लैग लगा दिया। यहां रेल अधिकारियों और कंट्रोलर को लगा कि ब्लॉक का समय समाप्त हो गया है तो उन्होंने केरल एक्सप्रेस को उसी ट्रैक पर दौड़ा दिया। ट्रेन दोपहर 3.13 बजे मरम्मत वाले ट्रैक पर पहुंची तो यहां पटरी दो भाग में बंटी थी जबकि तकनीकी रूप से पटरी 3.10 बजे तक रेल संचालन के लिए दुरुस्त हो जानी थीं।
जांच अधिकारियों ने दर्ज कराए बयान
मंडल रेल प्रबंधक दीपक कुमार सिन्हा के निर्देश पर गठित रेल अधिकारियों की टीम ने एसएसई से लेकर घटना के समय ट्रैक पर काम कर रहे ट्रैक मेंटेनरों के बयान दर्ज कराए हैं। साथ ही घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया।
ब्लॉक पूरा होने पर बंद करते काम तो भी होता बड़ा हादसा
तकनीकी रूप से सीनियर सेक्शन इंजीनियर की गलती सामने आई है, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इस मामले में यदि ब्लॉक का समय समाप्त होने के बाद भी काम नहीं किया जाता तो और बड़ा हादसा हो सकता था। डेढ़ घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक का समय निकल जाने के बाद भी जब ट्रैक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुआ तो रेलकर्मियों ने बैनर फ्लैग लगाकर ही उसे पूरा करने का प्रयास किया जिसके चलते यह स्थिति बन गई।
