जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के नारे को बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में साकार करने के फार्मूले पर काम कर रही है। इसके लिए पार्टी मेरठ शहर और दक्षिण विधान सभा सीटों पर मुस्लिम कार्ड खेल सकती है। कहा जा रहा है कि विस चुनाव से पहले अखलाक परिवार हाथी की सवारी कर सकता है।

वर्ष 2012 के विस चुनाव के बाद से बसपा का ग्राफ यूपी में लगातार गिरता चला गया। बसपा ने पूर्व में दलित, मुस्लिम, ओबीसी और ब्राह्मणों को साधकर यूपी की सत्ता हासिल की थी। मुस्लिम, ओबीसी ने जब से बसपा से किनारा किया तो बसपा पश्चिमी यूपी से पूरी तरह साफ हो गई। 

अब फिर से बसपा सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम यूपी की सत्ता में वापसी का गणित बैठा रही है। अगर हम मेरठ शहर और मेरठ दक्षिण विधान सभा सीट की बात करें तो ये दोनों सीटें मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती हैं। जातीय आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर सीट पर 1.70 लाख मुस्लिम मतदाता हैं।



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