कानपुर में बैंक पीओ परीक्षा में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से अभ्यर्थी को सहायक (सॉल्वर) मुहैया कराने के खेल में स्वास्थ्य महकमे में कॉकस सक्रिय है। इसमें डॉक्टर, दिव्यांग बोर्ड के सदस्य, कर्मी और तकनीशियनों की मिलीभगत की आशंका है। यह कॉकस फर्जी प्रमाणपत्र तो बनवा ही रहा है। इसके साथ सुविधा शुल्क लेकर दिव्यांगता प्रतिशत भी बढ़ाता है।
सचेंडी में एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा में सेंधमारी के खुलासे के बाद इस कॉकस के राज बाहर आने की उम्मीद है। वहीं, सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने प्रकरण की विभागीय जांच की भी बात कही है। सीएमओ की ओर से गठित दिव्यांग बोर्ड में हड्डी, नेत्र, नाक-कान-गला, मानसिक रोग सहित सभी तरह के विशेषज्ञ हैं। सूत्रों के अनुसार, फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने वाला कॉकस इनमें से कुछ चिकित्सकों और कर्मियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा करता है।
