
भाजपा अवध की सीटों पर विशेष ध्यान रख रही है।
– फोटो : अमर उजाला।
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भाजपा अवध की सीटों पर विशेष ध्यान रख रही है।
– फोटो : अमर उजाला।
2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने अयोध्या की हार का राजनीतिक असर सीमित रखने, रामनगरी में अपनी पकड़ साबित करने और हार के राजनीतिक संदेश को बदलने की चुनौती भी है। राम मंदिर को अपनी प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि बताने वाली भाजपा के लिए फैजाबाद लोकसभा सीट गंवाना महज एक सीट की हार नहीं, बल्कि उसके चुनावी दावों और स्थानीय जनसमर्थन के बीच अंतर का सवाल भी है। इस दाग को धोने के लिए भाजपा अब विधानसभा चुनाव में अवध की सभी सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेगी।
इसी कड़ी में शनिवार को भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की अवध क्षेत्र की पहली संगठनात्मक बैठक में सभी विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का जोर इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर चुनावी रणनीति बनाने की कवायद बताती है कि पार्टी केवल बड़े मुद्दों और उपलब्धियों के सहारे आगे बढ़ने के बजाय स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति का आकलन करना चाहती है। यही वजह है कि तावड़े ने पहले जिला प्रभारी व पदाधिकारियों के साथ बैठक की, इसके बाद क्षेत्रीय संगठन और फिर जिले के सभी जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठक करके फीडबैक लिया। माना जा रहा है इन त्रिस्तरीय बैठक में मिले अलग-अलग फीडबैक की समीक्षा के बाद अयोध्या की सभी विधानसभा सीटों को जीतने के लिए एक फुलप्रूफ चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।
तावड़े की बैठक में सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य तय करने और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक को महत्व देने का संदेश इसी तैयारी का हिस्सा है। अयोध्या में पार्टी की रणनीति का असल राजनीतिक परीक्षण यह होगा कि वह लोकसभा चुनाव के नतीजे से मिले संदेशों को कितना गंभीरता से समझती है और स्थानीय स्तर पर संगठन तथा मतदाताओं के साथ अपने संवाद में कितना बदलाव करती है। 2027 में अयोध्या भाजपा के लिए केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव के बाद अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता और संगठनात्मक पकड़ को लेकर उठे सवालों का जवाब देने का भी महत्वपूर्ण मोर्चा रहेगा।