ताराचंद शर्मा की ओर से वर्ष 2013 में अदालत में नगर निगम से बना एक फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। इसमें उसे वर्ष 1998 में मृत दर्शाया गया था। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 13 अगस्त 2013 को इस संबंध में अपनी आख्या दी थी। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र अन्य दस्तावेजों और पुलिस की आख्या को सही मानते हुए अदालत ने 20 सितंबर 2013 को आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी थी।

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