मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जेएस यूनिवर्सिटी, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के संबंध में किए निर्णय में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखा गया है। इस विवि में वर्तमान में करीब 15 हजार विद्यार्थी अध्यनरत हैं। इनके भविष्य को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि जेएस विवि का संचालन अब आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय संभालेगा।

जेएस विवि के प्रशासन पर आरोप है कि नियमों को तोड़ते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैकडेट में अंकतालिकाएं व डिग्रियां जारी कीं गईं। इन फर्जी डिग्रियों का उपयोग राजस्थान शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयन के लिए किया गया। राजस्थान पुलिस की जांच के बाद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलसचिव की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के पास मानक के अनुरूप 40 एकड़ भूमि होनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर केवल 35.637 एकड़ ही पाई गई। इसके अलावा यह भी आरोप है कि छात्रों के प्रवेश, परीक्षा परिणाम और डिग्रियों का विवरण उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को नियमित रूप से नहीं भेजा गया।

आगरा विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी

जेएस विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक अभिलेख अब डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को सौंपे जाएंगे। अब तक जारी की गई सभी डिग्रियों और अंकतालिकाओं की गहन जांच आगरा विश्वविद्यालय द्वारा की जाएगी, ताकि वास्तविक और फर्जी छात्रों की पहचान हो सके। परिसमापन की अवधि में कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित की गई है, जो प्रशासनिक कार्य देखेगी।

जेएस विवि की ओर से कोई बयान नहीं

इस मामले में कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसले पर जेएस विवि से जुड़े प्रबंधन व प्रशासन ने कोई भी बयान जारी नहीं किया है। हालांकि बताया जा रहा है कि प्रबंधन और प्रशासन को कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी हो गई है और विविध राय पर विचार कर रहा है।

 



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