
नमो घाट पर आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन समारोह सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
– फोटो : उज्जवल गुप्ता
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काशी तमिल संगमम का दूसरा चरण ज्योतिर्लिंगों की आभा से जगमम हो उठा। गंगा तट पर काशी और तमिल की परंपरा, संस्कृति और कला एकाकार हुई। इसके साथ ही दूसरे चरण ने नया अध्याय भी रच दिया गया। तमिलनाडु से आया गंगा दल गंगा तट पर अपने स्वागत से अभिभूत नजर आ रहा था।
हर किसी के होठों पर यही बात थी कि काशी आकर ऐसा लगा कि जैसे कोई मनचाहा सपना साकार हो गया हो। नमो घाट पर रविवार शाम दक्षिण के सुप्रसिद्ध गायक सिड श्रीराम ने कर्नाटक शैली में काशी विश्वनाथ और रामेश्वर की संगीतमय आभा में प्रस्तुति दी।
उन्होंने गायन का आगाज गणपति वंदना से किया। उन्होंने गंगा पद पंकज, संकट हरण नीलकंठ सुनाकर काशी और तमिल संस्कृति के सुमधुर मिलन और इसके महात्म्य का वर्णन किया। दक्षिण के जाने माने कलाकार के मंच पर पहुंचते ही दक्षिण भारत से आए युवाओं ने हर्ष ध्वनि से उनका स्वागत किया।
सिड श्रीराम ने एक-एक कर चार गीत सुनाए। उन्होंने रंगपुर विहारा से दक्षिण भारत के त्रिची और सापश्य के जरिये राम को समर्पित प्रस्तुति दी। इसके बाद रामनाथम भजेगम के जरिये रामेश्वरम और काशी की महिमा का बखान किया।
