यूपी विधान परिषद में सपा एमएलसी मुकुल यादव के फर्जी हस्ताक्षर से सवाल लगाने के मामले में जांच शुरू हो गई है। अनु सचिव को फुटेज जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोमवार को कुछ फुटेज इकट्ठा भी किए गए हैं।
विधान परिषद में सपा एमएलसी मुकुल यादव के फर्जी हस्ताक्षर से सवाल लगाए गए। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों के देर से आने पर आधे दिन का वेतन काटने और अधिकारियों के देर से आने की छूट पर सवाल पूछा गया था। मांग की गई थी कि सभी के लिए समान व्यवस्था बनाई जाए। बाद में पता चला कि यह सवाल एमएलसी के फर्जी हस्ताक्षर से लगाए गए थे।
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सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए। सोमवार को विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह ने अनु सचिव रामेन्द्र पटेल को जांच अधिकारी नामित किया। उन्हें 15 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। दोपहर बाद रामेन्द्र पटेल ने जांच शुरू कर दी। परिषद सचिवालय में जहां प्रश्नों को लिया जाता है वहां के सीसी कैमरों की फुटेज पर विशेष निगाह है। सभी फुटेज इकट्ठा करने के बाद एक्सपर्ट टीम उनकी पड़ताल करेगी।
मालूम हो कि विधान परिषद में प्रश्न लगाने-सूचना मांगने के लिए आनलाइन के साथ ही आफलाइन व्यवस्था भी है। बताया जाता है कि विधान परिषद में पिछले वर्ष भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक के नाम से इसी तरह फर्जी हस्ताक्षर कर प्रश्न लगाने का मामला सामने आया था।
