योगी कैबिनेट ने प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों का इस साल का तीसरा सत्र तीन से छह अगस्त तक आहूत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक और अन्य विधायी कार्य होंगे। 2024 संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएगी।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि राज्य विधानमंडल का द्वितीय सत्र 30 अप्रैल को आहूत हुआ था लेकिन उसी दिन विधानसभा व विधान परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। बाद में 7 मई 2026 से सत्रावसान कर दिया गया था। संविधान के अनुच्छेद-174 और उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया व कार्य संचालन नियमावली के अनुसार विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। इसी व्यवस्था के अनुसार सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है।
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आगामी सत्र के दौरान संभल में 24 नवंबर 2024 को भड़की हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। जांच आयोग ने बीते वर्ष 28 अगस्त को 450 पन्नों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। इसमें संभल की डेमोग्राफी बदलने की साजिश का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के समय संभल नगर पालिका में 45 प्रतिशत हिंदू आबादी थी, जो वर्तमान में महज 15 फीसदी रह गई है। यह लगातार हिंसा से पलायन और हिंदुओं के कत्लेआम की वजह से हुआ। दंगा, लव जिहाद और धर्मांतरण के जरिये हिंदू आबादी कम की गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हिंदू आबादी 20 फीसदी से कम होने के बाद संभल में विदेशी बनाम देसी मुसलमान का संघर्ष शुरू हो गया। तुर्क और कन्वर्टेड हिंदू पठान आपस में लड़ने लगे। रिपोर्ट में बीते सात दशक के दौरान हुए 15 दंगों का जिक्र है। वहीं, 68 तीर्थस्थल व 19 पावन कूप पर कब्जा करने और हरिहर मंदिर का भी उल्लेख है, जहां बाबर काल के साक्ष्य मिले थे। कई आतंकी संगठनों के सक्रिय होने खासकर आसिम उर्फ सना-उल-हक की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है, जिसे अमेरिका आतंकवादी घोषित कर चुका है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि संभल में अवैध हथियार और मादक पदार्थों का कारोबार तेजी से पनप रहा है।
