भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े की मौजूदगी में प्रदेश के निगमों, आयोगों और बोर्ड में भाजपा पदाधिकारियों के मनोनयन पर सहमति बनी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ बैठक में पार्टी पदाधिकारियों के नामों को हरी झंडी दी गई। इसकी सूची जल्द जारी होने की संभावना है। वहीं विनोद तावड़े ने दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की।
विनोद तावड़े के राजधानी आने के बाद ताबड़तोड़ बैठकों से यूपी में भाजपा की नई टीम बनाने को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्र बताते हैं कि नई टीम में लंबे समय से पदों पर जमे कुछ पदाधिकारियों को हटाया जा सकता है। वहीं कुछ नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना है। कई नामों पर सहमति बनने के बाद अब संगठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर फोकस किया जा रहा है। सरकार और संगठन में पूर्वांचल का प्रभाव अधिक होने के कारण अब पश्चिमी यूपी, अवध, बुंदेलखंड और काशी क्षेत्र को संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक विनोद तावड़े के साथ प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की बैठक में पार्टी संगठन में होने वाले फेरबदल पर भी चर्चा हुई, जिसमें कई नामों पर सहमति बनी। प्रदेश अध्यक्ष ने विनोद तावड़े से मुलाकात के बाद दिल्ली का रुख किया, जहां केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों की नियुक्ति, राजनीतिक नियुक्तियों और आगामी मंत्रिमंडल विस्तार पर बात की। इससे पहले, शनिवार को दिल्ली से लौटने के बाद पंकज चौधरी ने सीएम योगी से मुलाकात की थी।
इनसे भी की मुलाकात
विनोद तावड़े ने महिला नेताओं में कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्यमंत्री रजनी तिवारी और महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान से भी बात की। उन्होंने पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, रमापति राम त्रिपाठी और भूपेंद्र सिंह चौधरी से भी प्रदेश पदाधिकारियों की तैनाती और राजनीतिक नियुक्तियों पर बात की। वह सोमवार को कार्यकर्ताओं और विधायकों से भी फीडबैक लेकर हाईकमान को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद यूपी भाजपा की नई टीम बनाने और राजनीतिक नियुक्तियों पर मुहर लग सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद अब पार्टी राज्यों में भी नई नेतृत्व टीम तैयार करने के लिए आगे बढ़ रही है। इसी रणनीति के तहत यूपी भाजपा संगठन में करीब तीन साल बाद बदलाव की तैयारी है।
