
23 बस स्टेशनों को बनाया जाएगा आधुनिक।
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प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा 23 प्रमुख बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें से 11 बस स्टेशनों के लिए फर्म अनुबंधित कर दी गई है। शेष 12 बस स्टेशनों के लिए मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के बाद अनुबंध किए जाएंगे।
परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, गोरखपुर, अयोध्याधाम, बुलंदशहर, बरेली, रायबरेली, मिर्जापुर, वाराणसी, कानपुर, मथुरा एवं हापुड़ के जिलाधिकारियों को पीपीपी मॉडल पर बनने वाले 23 बस स्टेशनों को विकसित कराये जाने के लिए निर्माण अवधि में बसों के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कराये जाने के निर्देश दिए हैं। पीपीपी मॉडल पर निर्मित होने वाले इन बस स्टेशनों पर आधुनिक यात्री सुविधा, रिटेल आउटलेट्स, मल्टीप्लेक्स इत्यादि की सुविधाएं उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को बस स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
10 एआरएम वित्त हुए ट्रांसफर, नौ अपनी जगह पर डटे
रोडवेज अफसरों की मनमानी का आलम यह है कि दस सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक(वित्त) के ट्रांसफर हुए, जिसमें नौ अपनी पुरानी सीटों पर ही डटे हैं। तैनाती स्थल छोड़ने को तैयार नहीं हैं। तबादला वापस लेने के लिए प्रबंध निदेशक से गुहार लगा रहे हैं। रोडवेज के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने तबादला नीति के तहत 25 से 30 जून के बीच दस एआरएम वित्त के ट्रांसफर किए, उनके आदेश जारी होने के बाद नई तैनाती लेने को कहा। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद तक सिर्फ एक एआरएम वित्त ने ही कार्यभार ग्रहण किया है।
शेष नौ एआरएम वित्त पुरानी तैनाती छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसमें बिरला सिंह को अयोध्या से रोडवेज मुख्यालय, अजय सिन्हा को मुख्यालय से अयोध्या, राजेश शर्मा को आजमगढ़ से मुख्यालय, एसपी शुक्ला को लखनऊ से गोरखपुर, मुकेश अग्रवाल को मेरठ से इटावा, संतोष कुमार को मुख्यालय से आजमगढ़, सुरेश कुमार को मुख्यालय से मेरठ जाकर चार्ज लेना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रोडवेज प्रवक्ता अजीत कुमार सिंह ने बताया कि तबादला नीति के तहत जो भी ट्रांसफर हुए हैं, उनकी समीक्षा प्रमुख सचिव की बैठक में की जाएगी।
