उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद पंकज चौधरी ने कहा कि यह अब तक के उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नए दायित्व को लेकर उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें रूल करने के लिए नहीं, बल्कि रोल अदा करने के लिए मिली है। उन्होंने संगठन, संपर्क, संवाद और समन्वय को नेतृत्व का मूल मंत्र बताया।

पंकज चौधरी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पहले भाषण में संदेश दिया कि सरकार व संगठन दोनों धड़े एक हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि मैं आपकी बात सुनूंगा, आपके लिए लडूंगा और मरूंगा। उन्होंने कहा कि संगठन सर्वोपरि है और उसका हर आदेश सर्वमान्य है। आपसी समन्वय से काम होगा तो नतीजे भी बेहतर होंगे।

चौधरी ने शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, यह भाजपा में ही संभव है कि मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिले। साथ ही कहा कि लखनऊ को भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु माना जाता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभालते हुए मैं रोमांचित और उत्साहित हूं। उन्होंने जिम्मेदारी देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और संघ परिवार का आभार जताया।

कार्यकर्ता, कार्यालय, कार्यक्रम, कोष हैं चार स्तंभ

पंकज चौधरी ने कहा कि किसी संगठन को चलाने के लिए कार्यकर्ता, कार्यालय, कार्यक्रम और कोष चार प्रमुख स्तंभ हैं। कार्यालय हम सभी के लिए तीर्थ स्थान जैसा है। कार्यक्रमों के जरिये पार्टी के विचार जनता तक पहुंचते हैं। इन सबके लिए कोष की जरूरत होती है। वहीं, सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ कार्यकर्ता है। कार्यकर्ता ही वास्तविक पूंजी और शक्ति हैं।

संगठन, संपर्क, संवाद, समन्वय ही मूलमंत्र

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मेरे नेतृत्व का मूलमंत्र संगठन, संपर्क, संवाद व समन्वय रहेगा। संपर्क व संवाद से संगठन को सशक्त बनाना और पार्टी के विचारों को जनमानस तक पहुंचाना प्राथमिकता होगी। सरकार के जनहितकारी कार्यों को जनता तक पहुंचाना पार्टी व कार्यकर्ताओं का दायित्व है। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी पद पर बैठने वाला व्यक्ति भूतपूर्व हो सकता है लेकिन कार्यकर्ता कभी भूतपूर्व नहीं होता।



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