नीट-यूजी पेपर लीक जैसे मामलों के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की वर्ष 2025 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती -2022 की परीक्षा में भी गड़बड़ी और अवैध वसूली के आरोप लगे। तब कहा गया कि सब कुछ पहले से ही तय था। ऐसे में अभ्यर्थियों में भरोसा कैसे बढ़े, इसे लेकर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष व पूर्व डीजीपी डाॅ. प्रशांत कुमार से अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता विनोद कुमार तिवारी ने विशेष बातचीत की।

सवाल: भर्ती परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और बेदाग बनाने के लिए परीक्षा प्रणाली में किन नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

जवाब : आयोग की परीक्षा प्रणाली में व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। डिजिटल ट्रैकिंग, एआई आधारित निगरानी और बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिये परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और बेदाग बनाने की पुख्ता तैयारी की गई है।

सवाल : वर्ष 2025 में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का पेपर आउट होने के बाद अभ्यर्थियों में आयोग के प्रति बनी नकारात्मक धारणा को कैसे बदलेंगे।

जवाब : असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2022 की परीक्षा में एसटीएफ की जांच में कमियां उजागर हुई थीं। इसमें कुछ लोग पकड़े भी गए थे। अब कोई भी दुष्प्रचार करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। यदि किसी ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करने, अफवाह फैलाने या व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की तो उसके साथ अपराधियों जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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