When chaos broke out due to candidates seeking tickets from Janata Party

पुराने पन्नों से: जब जनता पार्टी के टिकटार्थियों से फैल गई अराजकता
– फोटो : अमर उजाला आर्काइव

विस्तार


इन दिनों लोकसभा चुनाव की सरगर्मी जोरों पर है। ऐसे में पिछले चुनावों के कुछ किस्से अनायास ही याद आ जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा छठवीं लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। छठवीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हराकर जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। इसके बाद चुनाव में जनता पार्टी का टिकट जीत की गारंटी बन गया। 

यही वजह थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए लखनऊ में 10 हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई थी। हालात अराजक हो गए। टिकट की उम्मीद में आए नेताओं ने चयन समिति के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें धमकियां दीं। कुछ कार्यकर्ता अनशन पर भी बैठ गए।

अमर उजाला में 12 मई, 1977 को प्रकाशित खबर के अनुसार, बदसुलूकी के बाद चयन समिति को टिकट देने वालों का पूर्व घोषित साक्षात्कार भी रद्द करना पड़ा। जनता पार्टी के नेताओं से लखनऊ न रुककर अपने जिलों में लौटने का अनुरोध किया। राजधानी लखनऊ में टिकटार्थियों की भीड़ को नियंत्रित करना वश से बाहर हो गया। 

कार्यकर्ता अपने पुराने घटकों के माध्यम से टिकट पाने के लिए लगे थे। कुछ लोग जेपी का नाम लेकर पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग को टिकट दिलाने के लिए टेंट लगाकर अनशन पर बैठ गए। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त भी इससे परेशान होकर पार्टी के केंद्रीय नेताओं से बातचीत के लिए दिल्ली चल गए। 

लखनऊ में टिकट के लिए छात्र वाहिनी के नाम पर प्रदर्शन भी किए गए। उनकी मांग थी कि 20 प्रतिशत टिकट युवकों को ही दिए जाएं। कुछ कार्यकर्ता जनता पार्टी के कार्यालय में घुस गए और पूर्व परिवहन मंत्री राजमंगल पांडे के साथ दुर्व्यवहार किया। चयन समिति के अन्य लोगों को भी धमकाया गया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *