संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं आय बढ़ाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं जिनमें महिलाएं समूह बनाकर उत्पादों को तैयार कर रही हैं और उनकी बिक्री कर रही है। जिससे उनकी आमदनी बढ़ने से आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा दीपावली के अवसर अर्बन हाट परिसर में मंडलीय सरस मेले का आयोजन किया गया हैं। इसमें विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूह एवं ग्रामीण महिला शिल्पकारों द्वारा बनाए गए उत्पाद हस्तशिल्प, कलाकृतियां, व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं। इसमें उत्पादों की बिक्री की जा रही है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि वह अपने क्षेत्र में दस महिलाओं को जोड़कर समूह बनाकर काम कर रही हैं। इनमें बांस से घरेलू सजावटी सामान,दालों की साफ-सफाई कर पैकिंग, हस्तशिल्प कला में मिट्टी की कलाकृतियां बनाना, कपड़े से घर की सजावट का सामान तैयार करना, बैग बनाना, सरसों की पिराई और पैकिंग करके शुद्ध तेल तैयार करना जैसे विभिन्न उत्पादों को गुणवत्ता के साथ तैयार कर बाजारों विक्रय करते हैं। इससे हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
ये बोलीं समूह की महिलाएं
झांसी के भोजला की रहने वाली जयंती ने बताया कि वह समूह द्वारा बनाए मिट्टी के दीये, ग्वालन हाथ के बने बंदनवार तैयार किए गए हैं। जिसको बाजार में बिक्री या मेलों में बिक्री करते हैं। इससे काफी आमदनी हो जाती है।
बरुआसागर के घुघुवा में स्वयं सहायता समूह की मुन्नी देवी ने बताया कि समूह की महिलाओं द्वारा सरसों के शुद्व तेल को तैयार किया जाता है। इसके लिए समूह द्वारा स्पेलर लगाया गया हैं राई बाजार से खरीद कर पिराई करते हैं और पैकिंग करके बाजार में बेचते हैं। जिससे 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह की कमाई हो जाती है।
– ललितपुर के मड़ावरा की हरकुंवर स्वयं सहायता समूह द्वारा बांस से निर्मित घरेलू सजावटी सामान तैयार करते हैं। इसमें बांस के शोपीस, ट्रे, पानी का जग, कुर्सी के अलावा दालों को खरीदकर उसकी साफ-सफाई करके पैकिंग करते हैं। जिससे लोगों को शुद्व और गुणवत्ता पूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।
– सिमरावारी की दीपा मजूमदार ने बताया कि समूह की महिलाओं द्वारा मिट्टी की मूर्ति, दीये का आकर्षक रंगों से सजा कर तैयार करती हैं और कपड़े के बैग, थैले बनाकर अपना रोजगार करती हैं। इसके अलावा अन्य लोगों को भी रोजगार देतीं हैं।
– सिमरावारी की राधा स्वयं सहायता समूह में कपड़े के पैरदान, आसन, दरी एवं अन्य कपड़े के उत्पादों को तैयार करते हैं जिनको बाजार और मेलों में स्टॉल लगाकर बेचते हैं। जिससे अच्छी खासी इनकम हो जाती है। जिससे घर की स्थित में आर्थिक रूप से काफी सुधार हुआ है।
