उरई । कालपी बस स्टैंड पर एक साल पहले हुए चर्चित मारपीट और आगजनी कांड में मुकदमे के ट्रायल के दौरान मुख्य वादी सुरेंद्र निरंजन की शनिवार को अचानक मौत हो गई। उनकी मौत से मुकदमे में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस इस मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ डकैती न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि तीन आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई थी। अब मुकदमे की सुनवाई में अन्य गवाहों की गवाही और न्यायालय में पेश किए जाने वाले साक्ष्य अहम होंगे।

शहर कोतवाली क्षेत्र के कालपी बस स्टैंड पर 29 अगस्त 2025 की देर रात एक निजी बस के काउंटर पर विवाद हुआ था। आरोप था कि काउंटर की खिड़की पर बैठी युवती का कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। वहां मौजूद बस संचालक ने इसका विरोध किया तो कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इसके बाद बस संचालकों को दौड़ाकर पीटा गया और दो बाइकों में आग लगा दी गई। घटना में शहर निवासी अभिषेक और अंशु गंभीर रूप से घायल हुए थे।

घटना के बाद मोहल्ला पटेल नगर निवासी सुरेंद्र निरंजन की तहरीर पर पुलिस ने बजरिया निवासी शादाब, उसके भाई माजिद सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी माजिद खान समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद डकैती न्यायालय में माजिद, दिलशाद, शादाब, मकसूद बेग, आफताब, मैराज, जावेद, कादिर, जुबैर, शाहिद अली, मोहम्मद हारून, मोहम्मद अब्दुल, तनवीर और जयंत उर्फ छोटू के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। वहीं, माजिद, उसके भाई शादाब और मकसूद बेग के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई थी। मामले में मुख्य आरोपी के फार्म हाउस को ओडीए द्वारा ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई भी चर्चा में रही थी।

मुख्य वादी की मौत के बाद गवाहों की भूमिका अहम

मुकदमे के ट्रायल के दौरान मुख्य वादी सुरेंद्र निरंजन की मौत से सुनवाई में उनकी गवाही को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। अब मामले में अन्य गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, उनकी मौत का मुकदमे की आगे की कार्यवाही पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह न्यायालय में होने वाली सुनवाई और अभिलेखों पर निर्भर करेगा।



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