धनतेरस पर हुए सदन के अधिवेशन में नगर निगम ने शहर के विकास के लिए धनवर्षा की। पार्षदों के प्रस्ताव पर महापौर हेमलता दिवाकर ने विकास कार्यों के लिए 88 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। नगर निगम के निर्वाचित 100 पार्षदों के साथ ही 10 मनोनीत पार्षद बजट से अपने क्षेत्र में पानी, सीवर, सड़क, नाली और प्रकाश व्यवस्था के काम करा सकेंगे। हर पार्षद को 80-80 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
नगर निगम सदन के सामान्य अधिवेशन में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ लेकिन उसके बाद जब दोबारा अधिवेशन शुरू हुआ तो महापौर ने पूर्व सदनों और कार्यकारिणी बैठकों के प्रस्ताव संशोधनों के साथ पास कर दिए। प्रश्नकाल के बाद प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों ने विकास कार्य कराने की मांग की।
148 प्रस्तावों में 38 प्रस्ताव विकास कार्यों से जुड़े थे, इसलिए सदन ने तय किया कि हर प्रस्ताव पढ़ने की जगह इन्हें पढ़ा हुआ माना जाए और पारित कर दिया जाए। इस पर महापौर ने पार्षदों की मांग पर पूर्व में तय 50 लाख की जगह 80 लाख रुपये देने का फैसला किया। दिवाली पर महापौर ने सदन पटल से 80-80 लाख रुपये के विकास कार्य हर वार्ड में कराने की घोषणा की। इस तरह करीब 88 करोड़ रुपये शहर में विकास कार्यों और निर्माण पर खर्च होंगे।
चौराहों के नाम बदलने, मूर्तियों के प्रस्ताव कमेटी करेगी तय
धनतेरस पर हुए सदन के अधिवेशन में सर्वसम्मति से तय किया गया कि चौराहों के नाम बदलने, गेट, मूर्तियां लगाने के सभी प्रस्ताव कमेटी को भेज दिए जाएं। कमेटी शासनादेश के आधार पर जो तय करेगी, वह मान्य होगा। करीब 13 प्रस्ताव चौराहों, मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने और मूर्तियां लगाने के थे। इनमें सुल्तानगंज पुलिया मेट्रो स्टेशन का नाम शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान के नाम पर रखने, आईएसबीटी मेट्रो स्टेशन का नाम सम्राट अशोक, फतेहाबाद रोड मेट्रो स्टेशन का नाम महाराजा अग्रसेन के साथ चौराहों के नाम बदलने की मांग रखी गई थी।
सफाईकर्मियों की नियुक्ति में हुए घोटाले पर अफसरों की चुप्पी
पार्षद रवि माथुर ने सफाई व्यवस्था, सफाई मित्र, उद्यान विभाग और नगर स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती का मुद्दा उठाया। करीब एक घंटे तक प्रस्ताव पर हुई चर्चा में रवि माथुर ने कहा कि नगर निगम आउटसोर्सिंग पर सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में घोटाला हुआ है। 1190 कर्मचारियों का ब्योरा नहीं मिल रहा, जबकि हर माह उनका वेतन वर्ष 2023 से जारी हो रहा है। 18 पार्षदों ने सदन में कहा कि उन्हें 10 कर्मचारी नहीं दिए गए, जबकि कागजों पर अधिकारी 10-10 सफाईकर्मी देेने का दावा कर रहे हैं। महापौर ने इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए। गोशाला में चिकित्सकों की तैनाती और तय मानक से ज्यादा वेतन देने के सवाल पर अफसर चुप रहे। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संजीव वर्मा की तैनाती पर सवाल उठाया और शासनादेश और गजट की कॉपी पेश की। महापौर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को रिलीव करने के निर्देश नगर आयुक्त को दिए। उद्यान विभाग में 2.75 करोड़ रुपये से पौधों की खरीद की जांच कराने की पार्षद ने मांग की।

