शिवा हत्याकांड में आरोपी मॉडल श्रद्धा ने पुलिस से बचने के लिए बुर्के का सहारा लिया था। नेपाल से लौटने के बाद वह मुस्लिम बहुल इलाके में ठहरी। करीबियों की सलाह पर उसने बुर्का पहनना शुरू कर दिया, ताकि कोई उसे पहचान न सके। यही नहीं, उसने ट्रॉली बैग छोड़कर सामान्य झोला रख लिया। पुलिस के मुताबिक, गलत आईपी एड्रेस मिलने के कारण भी जांच टीम भटकती रही और श्रद्धा को पकड़ने में देरी हुई।
डीसीपी मध्य अर्पित विजय वर्गीय के मुताबिक, कानपुर निवासी एक चालक के फोन से हॉटस्पॉट लेने के बाद श्रद्धा ने अपने वकील से संपर्क किया। इससे पुलिस को चालक की लोकेशन का पता चला। चालक उस समय नागपुर में एक होटल के बाहर सवारी की तलाश में खड़ा था। नागपुर पुलिस ने उससे पूछताछ की और लखनऊ पुलिस को जानकारी दी।
कानपुर का चालक पुलिस को उस जगह ले गया, जहां उसने श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और दानिश उर्फ तनवीर को उतारा था। आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगालने पर तीनों ईरिक्शा से जाते दिखाई दिए। पुलिस ने ईरिक्शा चालक को ट्रेस किया तो वह एक फ्लैट तक पहुंचा, जिसे श्रद्धा ने ऑनलाइन किराये पर लिया था।
पुलिस के पहुंचने पर श्रद्धा ने दरवाजा खोलने से इन्कार कर दिया। उसने तुरंत अपने वकील को फोन किया और उनसे बात करने लगी। इसके बाद लखनऊ पुलिस और एसटीएफ की टीम नागपुर पहुंची और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने पूछताछ में बताया कि उसे ट्रॉली बैग लेकर निकलने पर लोगों की नजर पड़ने की आशंका थी। इसलिए उसने बैग खाली कर दिया और सामान्य झोला रख लिया था।
वीडियो वायरल कराने वालों की तलाश
पूछताछ में पुलिस ने श्रद्धा से लगातार वीडियो बाइट जारी करने और उनके सोशल मीडिया पर वायरल होने के पीछे शामिल लोगों के बारे में सवाल किए। पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। अब जांच की जा रही है कि कौन लोग उसे लगातार गाइड कर रहे थे और वीडियो वायरल कराने में किनकी भूमिका थी।
वकील की ड्रेस में पहुंचे पैरवीकार
हजरतगंज थाने में बृहस्पतिवार को वकील की ड्रेस में श्रद्धा के पैरवीकार भी मौजूद रहे। इनमें कुछ के हिस्ट्रीशीटरों के साथी होने की बात कही जा रही है। श्रद्धा के कोर्ट पहुंचने पर भी बड़ी संख्या में उसके करीबी जमा हुए। सुरक्षा के मद्देनजर आरोपियों को वज्र वाहन से पहले अस्पताल और फिर कोर्ट ले जाया गया। अदालत परिसर में भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
