
प्रतीकात्मक फोटो।
– फोटो : सोशल मीडिया
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प्रतीकात्मक फोटो।
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उत्तर प्रदेश में निर्माण कार्यों के ठेके हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाने के आरोप में जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड घिर गई है। कंपनी पर इस प्रमाणपत्र के आधार पर 3003 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य हासिल करने का आरोप है।
प्रदेश में कंपनी को 41 निर्माण कार्य आवंटित किए गए हैं। नियोजन विभाग के ईपीसी मिशन की जांच में सिद्धार्थनगर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य से संबंधित अनुभव प्रमाणपत्र विवादित पाया गया। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्रमाणपत्र उसके कार्यालय से जारी नहीं हुआ था।
नियोजन विभाग के ईपीसी मिशन के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार ने कंपनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें पूछा गया है कि निविदा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में कंपनी को जारी आशय पत्र (एलओए) व अनुबंध निरस्त करने और भविष्य की निविदाओं से प्रतिबंधित कर ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई क्यों न की जाए।
कंपनी ने गोरखपुर में वानिकी एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में लाला लाजपत राय चिकित्सालय परिसर के ट्रामा सेंटर को 200 बेड के एपेक्स ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करने और आगरा में 450 शैय्या वाले लेडी लायल महिला चिकित्सालय के निर्माण की निविदाओं में तकनीकी बोली के साथ सिद्धार्थ विवि, कपिलवस्तु के निर्माण का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया था।