Muzaffarnagar में जनता इंटर कॉलेज भोपा भूमि का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। जिले की ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था जनता इंटर कॉलेज, भोपा को वर्ष 1949 में दान स्वरूप प्राप्त लगभग 500 बीघा कृषि भूमि को कथित रूप से अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर जाट महासभा के पदाधिकारियों ने जिला अधिकारी उमेश मिश्रा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए संबंधित भूमि को विद्यालय के अधिकार में वापस दिलाने तथा यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारी बुधवार को डीएम कार्यालय पहुंचे और जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यह केवल भूमि का विवाद नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
ऐतिहासिक शिक्षण संस्था की विरासत बचाने की उठी आवाज
जाट महासभा के प्रतिनिधियों ने बताया कि जनता इंटर कॉलेज, भोपा जनपद मुजफ्फरनगर के ग्रामीण क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्था है। इसकी स्थापना क्षेत्र के समाजसेवियों, किसानों और ग्रामीणों के त्याग, सहयोग एवं दान की भावना से हुई थी। कई दशकों से यह विद्यालय ग्रामीण अंचल के हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करता आ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर अनेक छात्र विभिन्न सरकारी विभागों, प्रशासनिक सेवाओं, सेना, शिक्षा, न्यायपालिका और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसलिए यह संस्था केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शैक्षिक धरोहर के रूप में जानी जाती है।
1949 में लगभग 500 बीघा भूमि दान स्वरूप दी गई थी
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विद्यालय की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने तथा शिक्षा के सतत विकास के उद्देश्य से पंडित दामोदर प्रसाद, चंद्रमुनि एवं प्रद्युम्न कुमार, निवासी ग्राम मालपुरा, डाकघर भोपा, जनपद मुजफ्फरनगर द्वारा लगभग 500 बीघा कृषि भूमि विद्यालय की पैतृक संस्था शिक्षा परिषद हायर सेकेंडरी स्कूल, भोपा के नाम दान स्वरूप उपलब्ध कराई गई थी।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार यह दान 09 अगस्त 1949 को मिनजुमला नंबर 184, खसरा रकबा 302/1 अज 1227 सब के अंतर्गत तत्कालीन रजिस्ट्रार कार्यालय, तहसील जानसठ के माध्यम से विक्रय पत्र के जरिए दर्ज किया गया था।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस दान से संबंधित मूल अभिलेख आज भी केंद्रीय अभिलेखागार, निबंध कार्यालय, जनपद मुजफ्फरनगर में सुरक्षित उपलब्ध हैं, जो इस भूमि के स्वामित्व और दान प्रक्रिया का महत्वपूर्ण दस्तावेजी आधार प्रस्तुत करते हैं।
‘भूमि पर कथित अवैध कब्जे’ का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
जाट महासभा ने जिला अधिकारी को दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया कि वर्तमान समय में इस मूल्यवान शैक्षणिक संपत्ति के बड़े हिस्से पर कुछ भूमाफियाओं एवं असामाजिक तत्वों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि इस संबंध में उपलब्ध अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
विद्यालय की आय बढ़ने से हजारों विद्यार्थियों को मिल सकता है लाभ
ज्ञापन में कहा गया कि यदि दान स्वरूप प्राप्त भूमि विद्यालय को पुनः उपलब्ध हो जाती है तो उससे प्राप्त होने वाली आय का उपयोग विद्यालय के शैक्षिक विकास, आधारभूत संरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास और छात्रहित से जुड़े विभिन्न कार्यों में किया जा सकता है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि विद्यालय की वैधानिक संपत्ति सुरक्षित रहे और उसका उपयोग शिक्षा के लिए हो तो इसका सीधा लाभ हजारों छात्र-छात्राओं को मिलेगा।
विद्यालय परिसर में आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, डिजिटल कक्षाओं, खेल सुविधाओं, छात्रवृत्ति योजनाओं तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी इससे मजबूती मिल सकती है।
शिक्षा की संपत्ति को समाज की धरोहर बताया
जाट महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की संपत्ति केवल किसी संस्था की निजी परिसंपत्ति नहीं होती, बल्कि वह समाज की सामूहिक धरोहर होती है। ऐसे संसाधनों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के हित में आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्था की भूमि या संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो उसका प्रभाव केवल संस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और समाज के विकास पर भी पड़ता है।
डीएम से की विधिसम्मत कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी उमेश मिश्रा से अनुरोध किया कि उपलब्ध अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार का अवैध कब्जा अथवा अन्य अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधि के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, विद्यालय की दान स्वरूप प्राप्त भूमि को विधिक प्रक्रिया के अनुरूप सुरक्षित कराने की दिशा में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने का भी आग्रह किया गया।
जाट महासभा ने प्रशासन पर जताया विश्वास
ज्ञापन में जाट महासभा ने जिला प्रशासन की निष्पक्ष कार्यशैली पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जनपद की जनता को उम्मीद है कि शिक्षा और जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासन संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कार्रवाई करेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तथ्यात्मक जांच कराकर विद्यालय के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित कराना है।
दर्जनों पदाधिकारी रहे मौजूद
डीएम कार्यालय में आयोजित इस मुलाकात के दौरान जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान के साथ संगठन के दर्जनों पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में जनता इंटर कॉलेज, भोपा की दान स्वरूप प्राप्त भूमि के संबंध में निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग दोहराई।
मुजफ्फरनगर में जनता इंटर कॉलेज भोपा भूमि से जुड़े इस प्रकरण में जाट महासभा ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखते हुए उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने, विद्यालय को दान स्वरूप प्राप्त भूमि की विधिक स्थिति स्पष्ट करने तथा यदि जांच में किसी प्रकार के अवैध कब्जे या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने का अनुरोध किया है। अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्ष पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।
