
किनारी बाजार
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किनारी बाजार
आगरा की तस्वीर डेढ़ सदी में पूरी तरह बदल गई है। जिस शहर में कभी इंसान सुकून की खुली हवा में सांस लेता था, आज वहां जनसंख्या विस्फोट के कारण सांसें फूलने लगी हैं। वर्ष 1872 से 2011 के बीच के 150 वर्षों के आंकड़े गवाह हैं कि इंसानों का कुनबा जितनी तेजी से बढ़ा, भौगोलिक दायरा उतना ही सिमटता गया। इन 150 वर्षों में आबादी में 33.24 लाख का भारी-भरकम इजाफा हुआ, जबकि प्रशासनिक पुनर्गठन के कारण जिले के क्षेत्रफल में 898 वर्ग किमी की कमी आई। इसका सीधा असर हमारी जीवनदायिनी संपदा हवा, पानी और हरियाली पर पड़ा है, जिन पर अब पहले के मुकाबले पांच गुना ज्यादा दबाव है।