अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Arun Parashar

Updated Sun, 02 Aug 2026 12:16 PM IST

अदालत ने एएसआई से ट्रस्ट को हुए नुकसान और प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों के तहत जमीन के उपयोग का आकलन कराकर छह माह में मुआवजा देने का आदेश दिया था।


No 200 crore compensation for garden near Taj Mahal following the DM order

ताजमहल और यमुना नदी के बीच में बना बाग।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी



विस्तार

आगरा में ताजमहल और यमुना नदी के बीच में 7030 वर्गमीटर जमीन पर बने बाग के लिए दिए जाने वाले 200 करोड़ के मुआवजे पर डीएम की रिपोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। बीते साल मार्च में तीन बीघा एक बिस्वा (0.7 हेक्टेयर) जमीन के मालिकाना हक से जुड़े श्री ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान ट्रस्ट के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था, जिसमें छह माह के अंदर मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।


डीएम ने जमीन के डूब क्षेत्र में होने, कोई फसल न होने और चार माह तक बाढ़ के दौरान जलमग्न रहने जैसे बिंदुओं के आधार पर कमाई शून्य बताई है। संस्कृति मंत्रालय इस मामले में 4 अगस्त को होने वाली सुनवाई में अपना पक्ष पेश करेगा। ट्रस्ट ने वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ताज के उत्तरी दिशा में यमुना नदी के किनारे बाग बनाने के लिए ट्रस्ट की जमीन इस्तेमाल करने पर मुआवजा मांगा था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने बीते साल मार्च में दिए आदेश में स्पष्ट कहा था कि यमुना किनारे स्थित इस 0.7 हेक्टेयर भूमि पर मंदिर ट्रस्ट का मालिकाना हक पूरी तरह निर्विवाद है।

 



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