आधी रात का समय था, हम सब गहरी नींद में थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई बम फटा हो। पूरी बस हिल गई और ऊपर की सीटों पर सो रहे लोग नीचे आ गिरे। कुछ ही पलों में डीजल की तेज बदबू आने लगी और बस के अंदर धुएं का गुबार भर गया। जब चालक के केबिन की तरफ आग की लपटें उठती देखीं, तो रूह कांप उठी। ऐसा लग रहा था कि आज हममें से कोई जिंदा नहीं बचेगा, सब इस आग के गोले में भस्म हो जाएंगे।

यह आंखों देखा खौफनाक मंजर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण हादसे में बाल-बाल बचे कानपुर देहात के यात्री सत्यम विश्नोई और प्रयागराज के अभिषेक तिवारी ने बयां किया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद बस का दरवाजा जाम हो गया था। कुछ युवाओं ने हिम्मत दिखाकर कड़ी मशक्कत के बाद दरवाजा खोला, जिससे कई जिंदगियां बच सकीं। वरना कंडक्टर सुंदरलाल समेत कई और लोग आग की भेंट चढ़ जाते।

 




Double-decker bus catches fire on Agra-Lucknow Expressway at shikohabad in firozabad

मृतका ग्याश्री का फाइल फोटो।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


मैं चिल्लाता रहा, लोग मुझे खींचते रहे… और मेरी बहन आग में समा गई

मुकेश कुमार निवासी कानपुर, जो कि हादेस की मृतका ग्याश्री साहू के भाई हैं। उन्होंने कहा, मैं अपनी बहन गयाश्री के साथ देवकीनंदन ठाकुर जी के आश्रम के कार्यक्रम में शामिल होने वृंदावन जा रहा था। हादसे के वक्त हम दोनों पास वाली सीट पर सो रहे थे। झटका लगते ही आंख खुली तो चारों तरफ धुंध थी। भगदड़ में लोग मेरे ऊपर से गुजर गए। मैं उठकर अपनी बहन को बचाने के लिए ड्राइवर की सीट की तरफ दौड़ा, जहां वह बुरी तरह फंस गई थीं। इससे पहले कि मैं उन्हें खींच पाता, आग की लपटों ने केबिन को घेर लिया। मैं आग में कूदने लगा तो दूसरी सवारियों ने मुझे पीछे पकड़कर खींच लिया। मैं रोता रहा, चीखता रहा और मेरी बहन मेरी आंखों के सामने जिंदा जल गई। ढाबे पर खाना खाने के महज आधे घंटे बाद यह काल आ गया।

 


Double-decker bus catches fire on Agra-Lucknow Expressway at shikohabad in firozabad

हादसे में घायल शांतीदेवी के बेटे सत्यभान और अंकित।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


बहादुर बेटे ने कंधे पर लादकर बचाई मां और भाई की जान

शांतिदेवी निवासी सिकंदरा, कानपुर देहात ने बताया कि मैं अपने बेटों सत्यभान (13) और अंकित (18) के साथ गुड़गांव में रहने वाले बड़े बेटे दीपक से मिलने जा रही थी। हादसे के वक्त अचानक जोरदार झटका लगा और हम सब नीचे गिर गए। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। ऐसे में मेरे 18 साल के बेटे अंकित ने साहस दिखाया। वह खुद चोटिल होने के बावजूद तुरंत संभला और मुझे अपने कंधे पर बैठाकर बस से बाहर निकाला। इसके साथ ही उसने अपने छोटे भाई सत्यभान का हाथ खींचकर उसे भी मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

 


Double-decker bus catches fire on Agra-Lucknow Expressway at shikohabad in firozabad

शिकोहाबाद बस हादसा।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


जान बचाने को मोबाइल संभाला और खिड़की का शीशा तोड़ नीचे कूद गई पूजा

पूजा निवासी उन्नाव ने कहा, मैं कानपुर के फजलगंज से बस में सवार हुई थी। गुड़गांव में एक डॉक्टर के बंगले पर खाना बनाने का काम करती हूं। हादसे के वक्त मैं सो नहीं रही थी बल्कि मोबाइल चला रही थी। जैसे ही बस टकराई और चीख-पुकार मची, मैंने तुरंत अपने मोबाइल को संभाला और बिना कुछ सोचे-समझे खिड़की का शीशा तोड़कर नीचे छलांग लगा दी। नीचे गिरने की वजह से मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया है, लेकिन मुझे संतोष है कि मेरी जान बच गई।

 


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शिकोहाबाद बस हादसा।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


आधे घंटे बाद पहुंचीं दमकल की गाड़ियां

यात्रियों ने बताया कि हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी का माहौल था। टक्कर के करीब आधे घंटे बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचना शुरू हुईं, लेकिन तब तक आग इतनी भीषण हो चुकी थी कि उसने पूरी डबल डेकर बस को अपनी चपेट में ले लिया था और वह धूं-धूं कर जल रही थी।

 




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