कमिश्नरी पुलिस का रुतबा घटता जा रहा है। 15 दिन में सात बार जानलेवा हमले हुए। हमले किसी शातिर अपराधी ने नहीं बल्कि आम नागरिकों ने किए हैं। इनमें से कई बार आरोपी शराब के नशे में रहे तो कई बार गाड़ी रोक लेने पर हमलावर हो गए। पुलिसकर्मियों की कहीं वर्दी फाड़ी गई, कहीं जवानों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, तो कहीं पथराव किया।
हालात यह हैं कि जिन हाथों में कानून की रक्षा की जिम्मेदारी है वही हाथ अब खुद को बचाने में जुटे नजर आ रहे हैं। पुलिस पर हमलों की बढ़ती घटनाओं ने आम जनता के मन में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इन मामलों में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज चुक है।
एक माह में पुलिस पर छठवां हमला
– 23 अप्रैल 2026 को कैंट में शुक्लागंज नए गंगापुल पर इनोवा कार सवार ने ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर रमेश कुमार सरोज को रौंदने की कोशिश की।
– 21 अप्रैल 2026 को घंटाघर चौराहे पर चालान करने पर टेंपो चालक और उसके साथी ने पुलिस बूथ पथराव कर शीशे चकनाचूर कर दिया।
– 20 अप्रैल 2026 को बिठूर के टिकरा में चेकिंग में रोकने पर बोलेरो सवार पूर्व प्रधान दरोगा प्रदीप सिंह को कुचलकर भागा फिर कारोबारी फूल सिंह को रौंदा, मौत।
– 19 अप्रैल 2026 को डायल 112 पीआरवी में तैनात कांस्टेबल धीरेंद्र कुमार को हर्ष नगर में सिर फोड़कर पीटा और वर्दी फाड़ दी।
– 19 अप्रैल 2026 को गुमटी में तैनात ट्रैफिक सिपाही राकेश मिश्रा को रोड पर कार खड़ी करने से मना करने पीटा और धमकाया।
– 11 अप्रैल 2026 को नरवल के ग्राम पाली में पुलिसकर्मियों को दौड़ाकर पीटा और चौकी पाली को फूंकने की धमकी दी।
