युवती ने सात फेरे लेकर जीवन साथी चुना और ढेरों सपने संजोए। माता-पिता ने भी बड़े अरमानों से बेटी को विदा किया। मगर शादी के बाद जिस रिश्ते से नई जिंदगी की शुरुआत होनी थी, वह अधूरा रह गया। दूसरी ओर मायके से 40 लाख रुपये लाकर कर्ज चुकाने के दबाव ने रिश्ते में और कड़वाहट घोल दी। वाद पर परिवार न्यायालय संख्या-3 ने विवाह को शून्यकरणीय एवं अकृत (अमान्य) घोषित कर दिया।

पीड़िता ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि 2 दिसंबर, 2022 को उसका विवाह बंगलूरू निवासी युवक के साथ हुआ था। 4 दिसंबर, 2022 को वह पति के साथ बंगलूरू पहुंची। आरोप लगाया कि उनमें संबंध स्थापित नहीं हुए। पति ने इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या होने की बात बताई। कई बार इलाज कराने के लिए कहा लेकिन पति टालता रहा। इसके बाद पति और उसकी मां उससे मायके से 40 लाख रुपये लाकर कर्ज चुकाने का दबाव बनाने लगे। विरोध पर उत्पीड़न करते। जेवर और स्त्रीधन भी अपने पास रख लिया। पीड़ित परेशान होकर बंगलूरू से 12 मार्च, 2023 को मायके आ गई। एक महीने बाद मां के साथ फिर ससुराल गई। तब भी परिस्थितियां नहीं बदलीं। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण किया।

पत्नी की गवाही को माना उचित

अपर प्रधान न्यायाधीश-3 ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पत्नी का साक्ष्य स्वाभाविक, सुसंगत और महत्वपूर्ण तथ्यों के संबंध में पर्याप्त रूप से विशिष्ट था। उसके पिता की गवाही और अन्य परिस्थितियों से भी उसके कथनों को समर्थन मिला। पति के सामान्य खंडन मात्र से पत्नी के साक्ष्य को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। पति ऐसा विश्वसनीय साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे उसकी क्षमता प्रमाणित हो सके।

 



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