
पोइया घाट स्थित पांटून पुल
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
{“_id”:”6a0e8ae1ae24e272440883d8″,”slug”:”2-5-crore-spent-on-temporary-pontoon-bridges-in-agra-questions-raised-over-lack-of-permanent-infrastructure-2026-05-21″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”फेल पुलों का खेल: पीडब्ल्यूडी ने पीपे के पुलों पर ढाई करोड़ फूंके, सरकारी धन का यूं हो रहा बंदरबांट”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}

पोइया घाट स्थित पांटून पुल
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पीपों के फेल पुलों का खेल देखिए। दो साल में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कैंजरा घाट, बटेश्वर और पिनाहट में पांटून पुल बनाने, हटाने और संचालन के नाम पर चंबल और यमुना के पानी पर ढाई करोड़ की मलाई जमाई। हर साल पीपों के पुल बनाने और हटाने के नाम पर इंजीनियर और ठेकेदारों पर सरकारी धन के बंदरबांट के आरोप हैं।
दयालबाग स्थित पोइया घाट पर पीडब्ल्यूडी का पांटून पुल एक महीने में फेल हो गया। 75 लाख रुपये इस पुल पर खर्च किए जाने के बाद अब यहां 125 करोड़ रुपये से पक्का पुल बनाने के लिए सर्वे हो रहा है। नदियों के दोनों किनारों पर रहने वाले सैकड़ों ग्रामवासियों की आजीविका बरसात में पुल नहीं होने के कारण प्रभावित हो जाती है। यही कारण है कि पांटून पुल बनाए जाते हैं। पीडब्ल्यूडी के आंकड़े बताते हैं कि हर साल कैंजरा घाट, बटेश्वर और पिनाहट में पीपे के पुल (पॉन्टून ब्रिज) बनाने और उन्हें डिस्मेंटल करने के नाम पर ढाई करोड़ रुपये से अधिक बजट विसर्जित हो गया।