कानपुर में पांच जून की दोपहर जैसे ही निहारिका और मनीष के बीच विवाद हुआ। मीरा देवी भागकर अपार्टमेंट के गेट पर पहुंचीं तभी उन्हें खून से सराबोर बेटा मनीष गुप्ता पौत्र विष्णु के साथ सीढि़यों से उतरते हुए दिखा। उसके आखिरी शब्द, मां… निहारिका ने मार दिया। यह शब्द आज भी मीरा देवी के कानों में गूंज रहे हैं।  उनका बेटा मनीष गुप्ता 11 दिनों तक मौत से जूझता रहा और आखिरी में दम तोड़ दिया।



उसे पत्नी निहारिका ने चाकू से पांच जून को गोद दिया था। मीरा देवी के मुताबिक जब से पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ा था, तब से निहारिका ने उन्हें मम्मी कहना छोड़कर पागल बोलना शुरू कर दिया था। इकलौती बहू के लिए कितने अरमान थे। यहां तक कि बेटे की जिद के आगे झुककर दोनों की शादी भी करा दी थी। क्या पता था कि वही बहू बेटे की हत्यारिन बन जाएगी।



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