घर के बाहर खेल रही पांच साल की मासूम बच्ची को क्या पता था कि कुछ ही पलों बाद उसकी जिंदगी का भयावह वक्त सामने आने वाला है। आरोपी उसे बहलाकर टीले के पास झाड़ियों में ले गया और घिनौनी वारदात की। मगर उस बच्ची की चीखें खामोश नहीं रहीं, वही चीखें उसकी ढाल बनीं और सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत ने इस मामले में लाल गढ़ी निवासी मनमोहन उर्फ कालू को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला थाना खंदौली क्षेत्र का है। घटना 15 मार्च, 2025 की है। वादी (पीड़िता के पिता) ने थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक, उस दिन उनकी बेटी घर के बाहर खेल रही थी और घर के भीतर मां खाना बनाने में व्यस्त थी। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर आरोपी मनमोहन वहां पहुंचा और बच्ची को अपने जाल में फंसाकर झाड़ियों की ओट में ले जाकर दुष्कर्म किया।

दरिंदगी के दौरान मासूम चीखती रही, इससे वहां से गुजर रहे आरिफ और अन्य लोग सजग हो गए। उन्होंने चीख के सहारे घटनास्थल पर पहुंचकर आरोपी को दबोच लिया। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस की विवेचना के दौरान लोगों का कहना था कि यदि वह भाग गया होता या बच्ची की चीख उन्हें सुनाई नहीं देती तो आरोपी बच सकता था, वह दूसरे गांव का था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचक ने महज दो महीने के भीतर, 13 मई 2025 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।

न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी और खुद पीड़िता सहित कुल 7 गवाह अदालत के समक्ष पेश किए। इस पूरे मुकदमे में सबसे मजबूत कड़ी खुद पीड़िता की गवाही रही, जिसने अदालत के सामने अपनी और अपने साथ हुई नाइंसाफी की दास्तान बेबाकी से रखी।

 



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