बांदा जिला इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और यह गर्म टापू बनता जा रहा है। बुधवार को अधिकतम तापमान 48.0 व न्यूनतम 28 डिग्री दर्ज किया गया। दिन के समय सड़कें सुनसान हो रही हैं जबकि लोग रात में अपने काम निपटाने के लिए मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने रेड अलर्ट के साथ एडवाइजरी भी जारी की है।
बांदा में गर्मी का प्रकोप इतना भयानक है कि सुबह 10 बजे तक पूरा शहर थम सा जाता है। कई दुकानों के शटर खुले रहते हैं लेकिन शाम से पहले ग्राहक मिलना मुश्किल हो जाता है। अप्रैल से अब तक बिक्री में भारी गिरावट आई है। दोपहर के बाद शहर में सन्नाटा पसर जाता है। इस वर्ष 27 अप्रैल को बांदा का तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो उस दिन पूरे भारत में सबसे अधिक था। यह 1951 के बाद अप्रैल महीने का सबसे अधिक तापमान भी था। इससे पहले 2022 और 2026 में बांदा ने 47.4 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बनाया था। मंगलवार को बांदा एक बार फिर देश का सबसे गर्म शहर रहा जहां तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो एक नया रिकॉर्ड है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे केवल जलवायु परिवर्तन ही नहीं बल्कि वर्षों से हो रही पर्यावरणीय बर्बादी भी एक प्रमुख कारण है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी ने लोगों के दैनिक जीवन और कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान अब दिन की बजाय रात में खेतों में काम करने के लिए मजबूर हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मजदूर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच काम नहीं कर पा रहे हैं। खाने-पीने की दुकानें भी अब शाम ढलने के बाद ही खुलती हैं। भीषण गर्मी और बढ़े हुए बिजली लोड के कारण बांदा के 44 बिजली उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारी लगातार 1,379 ट्रांसफार्मरों पर पानी डाल रहे हैं। पिछले 45 दिनों में अत्यधिक गर्मी और बिजली की बढ़ी मांग के कारण कई ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, बिजली की आपूर्ति लगभग 16 घंटे तक ही चल पा रही है जिससे बिजली ग्रिड पर भारी दबाव बना हुआ है।
