सपा अध्यक्ष यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के साथ हैं, पर भाजपा की उस चालबाजी के खिलाफ हैं, जो एक साजिश के तहत की जा रही है। यह बिल पीडीए का हक मारने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। भाजपा देश की सबसे बड़ी पिछड़े वर्ग की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठी है।
अखिलेश ने जारी बयान में कहा कि ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाजी दिखा रहे हैं, उसके पीछे भाजपा के लोगों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े। अगर जनगणना हुई तो जातिवार आंकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी। इसलिए यह भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर ये जल्दबाजी बता रही है कि अब भाजपा जा रही है। भाजपा जनगणना को टालना चाहती है, क्योंकि तब जातीय जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी। भाजपा और उनके संगी-साथी इसे कभी भी देना नहीं चाहते हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि पीडीए प्रहरी एक विचार की तरह हर प्रदेश और हर दल ने स्वीकार कर लिया है। भाजपा राज में सबसे ज्यादादा दुखी तो महिलाएं ही हैं। भाजपा की कमीशनखोरी व चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी रसोई सूनी हो गई है, रही-सही कसर सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने पूरी कर दी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर ये बिल इतना ही सही है तो इसे मेरठ-नोएडा की पारिवारिक और कामगार महिलाओं के बीच बैठकर घोषित किया जाए। यह लोकतंत्र के खिलाफ खुफिया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं है, जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं होगा। यहां बता दें कि सपा प्रारंभ से ही महिला आरक्षण के भीतर एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग करती रही है।
