विजिलेंस के छापे में परिवहन विभाग के रिटायर एआरटीओ ललित कुमार की 35 करोड़ रुपये की काली कमाई का खुलासा हुआ है। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। ईडी ने विजिलेंस के अधिकारियों से ललित कुमार के खिलाफ जुटाए गए सबूतों और संपत्तियों की जानकारी मांगी है। ईडी इस मामले में जल्द प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करने की तैयारी में है। इसके बाद ललित कुमार की संपत्तियों को जब्त किया जाएगा।

विजिलेंस द्वारा मारे गए छापों में बड़े पैमाने पर काली कमाई के सुराग मिले हैं। ईडी ने विजिलेंस से ललित कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति भी मांगी है। इसमें उनकी वैध आय और चल-अचल संपत्तियों पर किए गए व्यय की जानकारी है। विजिलेंस की जांच में ललित कुमार की अघोषित आय पूर्व की जांच से 35 गुना अधिक पाई गई। इसके बाद आयकर विभाग और ईडी सक्रिय हो गए हैं।

 ईडी के अधिकारी ललित कुमार और उनके परिजनों के बैंक खातों की भी जांच करेंगे। इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत जुटाना है। विजिलेंस की जांच से पता चला है कि ललित कुमार ने अधिकतर संपत्तियों को खरीदने के लिए बैंक के जरिये भुगतान किया था। इसके अलावा बड़ी धनराशि नकदी के रूप में भी दी गई थी। जिन जगहों पर ललित ने संपत्तियां खरीदी हैं, उनका बाजार मूल्य भी पता लगाया जा रहा है।

विजिलेंस दर्ज करेगा बयान

विजिलेंस ललित कुमार को इस हफ्ते नोटिस भेजकर तलब करेगा। उनसे गोमतीनगर स्थित विजिलेंस मुख्यालय में जांच अधिकारी पूछताछ करेंगे। उनके ठिकानों से मिली करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों के बारे में बयान दर्ज किया जाएगा। विजिलेंस ने कई अन्य जिलों में भी उनकी संपत्तियों का पता लगाने के लिए उप निबंधक कार्यालयों को पत्र लिखा है। इन पत्रों का जवाब इसी सप्ताह मिलने की उम्मीद है।



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