देश-प्रदेश में जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया गति पकड़ रही है। इसके लिए जहां प्रशिक्षण हो रहे हैं तो मकान सूचीकरण व मकानों की गणना भी शुरू हो गई है। जनगणना से जुड़े काम में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को प्रगणक व पर्यवेक्षक बनाया जा रहा है। इसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कुछ जगह पर विद्यालय बंद हो गए हैं।
जनगणना के लिए अप्रैल के अंत में अधिकतर जिलों में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। कई जगह पर सुबह से शाम तक प्रशिक्षण में शिक्षकों को बुलाया गया। इसका असर विद्यालयों की पढ़ाई व स्कूल चलो अभियान आदि पर सीधा पड़ा है। खुद फर्रुखाबाद के बीएसए ने डीएम को पत्र भेजकर कहा है कि मकानों की गणना में सभी शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को लगा दिया गया है। इसके कारण विद्यालय बंद हो गए हैं। ऐसे में प्रधानाध्यापक को इस काम से मुक्त किया जाए।
इसी तरह बरेली व उन्नाव आदि जिलों के बीएसए ने अपने यहां डीएम व जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि सभी शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना में लगाने से विद्यालय बंद हो गए हैं। इससे स्कूल चलो अभियान, नए पंजीकरण, एमडीएम का वितरण आदि योजनाओं भी प्रभावित हो रही हैं। इन्होंने प्रधान शिक्षक व इंचार्ज शिक्षक को ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की है। ताकि विद्यालय का कार्य व पढ़ाई सुचारू की जा सके।
वहीं इस मामले में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पहले परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को लगभग एक साल एसआईआर में लगा दिया गया। इसके तुरंत बाद उन्हें बोर्ड परीक्षा में लगा दिया गया। परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट रही। सिर्फ परीक्षाओं के लिए शिक्षकों को दस दिन का समय दिया गया। अब जब नया सत्र शुरू हो रहा है।
सर्व शिक्षा अभियान और स्कूल चलो अभियान चल रहे हैं। इसमें बच्चों को जोड़ने की जगह शिक्षकों को जनगणना में लगा दिया जा रहा है। हमारी मांग है कि और भी विभाग है, उनके कर्मचारियों को इस काम में लगाया जाए। कई कम मानदेय वाले कर्मचारी चाहते हैं कि उनकी ड्यूटी इस काम में लगे। ऐसे में विद्यालयों की पढ़ाई भी नहीं प्रभावित होगी और काम भी हो जाएगा।
वरिष्ठता का भी उठा रहे मामला
शिक्षकों व बीएसए ने बताया कि इस ड्यूटी में एक ही विद्यालय में काम करने वाले 4200 ग्रेड पे वाले शिक्षक को सुपरवाइजर और 4800 व 4600 ग्रेड पे वाले शिक्षक को प्रगणक बनाया गया है। उन्होंने मांग की ड्यूटी को संशोधित करते हुए वरिष्ठता को ध्यान में रखकर शिक्षकों को सुपरवाइजर व प्रगणक बनाया जाए। शिक्षकों की ड्यूटी के लिखित आदेश जारी किए जाएं।
