राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोपों को लेकर चर्चा लगातार तेज है, लेकिन इस पूरे मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष ट्रस्टी अब तक सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट स्तर पर मामले की गोपनीय जांच कराई जा रही है और जांच पूरी होने तक कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी खुलकर कुछ कहने से बच रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जांच का केंद्र केवल कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि दान संग्रह से लेकर उसकी गणना, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया की तकनीकी समीक्षा की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित तिथियों की सीसीटीवी फुटेज, दान पात्रों को खोलने की प्रक्रिया, कैश काउंटिंग के दौरान मौजूद कर्मचारियों की भूमिका और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि मंदिर में दान राशि की गणना बहुस्तरीय व्यवस्था के तहत होती है। दान पात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खोला जाता है और गणना के दौरान कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है। ऐसे में जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित गड़बड़ी प्रक्रिया संबंधी कमी है या फिर किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका सामने आती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ कर्मचारियों के दायित्वों में बदलाव और संदिग्ध गतिविधियों की आंतरिक समीक्षा भी किए जाने की चर्चा है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच संत समाज और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख लोगों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग उठाए जाने के बाद मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
