भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा की स्थापना के 34 वर्ष पूरे होने पर कहा कि सपा की तीन सरकारों में काम कम और कांड-कारनामे ज्यादा हुए। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में उन्होंने कहा कि सपा का राजनीतिक सफर शुरू से ही गंभीर विवादों से घिरा रहा। उन्होंने रामपुर तिराहा कांड (1994) और गेस्ट हाउस कांड (1995) का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठे। इस दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से ‘सपा के पाप का घड़ा’ भी फोड़ा।
चौधरी ने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सत्ता का केंद्र परिवार रहा। उनका आरोप था कि डिंपल यादव को निर्विरोध निर्वाचित कराने के लिए प्रतिद्वंद्वियों को कथित धमकी दी गई, मुख्यमंत्री ने करीब 50 विभाग अपने पास रखे और चुनिंदा वीआईपी जिलों को बिजली आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं पर थानों में हस्तक्षेप और कानून हाथ में लेने के आरोप लगने की बात भी कही।
चौधरी ने यादव सिंह प्रकरण की सीबीआई जांच, यश भारती पुरस्कारों में प्रक्रिया की कथित अनदेखी और मुजफ्फरनगर व सहारनपुर दंगों में कानून-व्यवस्था पर उठे सवालों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 15 लाख लैपटॉप खरीदने के बावजूद करीब छह लाख वितरित हुए और सीएजी ऑडिट में इसका खुलासा हुआ। उन्होंने बेरोजगारी भत्ते के 20.58 करोड़ रुपये के मुकाबले प्रचार पर 15.06 करोड़ खर्च होने, यूपीपीएससी मामले के न्यायालय पहुंचने, पत्रकारों के उत्पीड़न, कंवल भारती की गिरफ्तारी, गन्ना किसानों की ब्याज माफी और जेपीएनआईसी की अधूरी परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर सपा को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
