रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ा दी गई है। अब प्रमुख स्टेशनों पर हर महीने और अन्य स्टेशनों पर छह महीने में पानी की बैक्टीरिया संबंधी (बैक्टीरियोलॉजिकल) जांच की जाएगी। वहीं, जिन स्टेशनों पर मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक तैनात हैं, वहां दिन में दो बार पानी में क्लोरीन की मात्रा की जांच की जा रही है। इसी क्रम में आगरा मंडल में पिछले एक सप्ताह के भीतर पानी के 102 नमूनों की जांच की गई है।

आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) संजय कुमार गौतम ने बताया कि 12 से 18 सितंबर के बीच 86 नमूनों में अवशिष्ट क्लोरीन की जांच की गई। इसके अलावा, 13 नमूनों का बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण कराया गया, जबकि तीन नमूने रासायनिक जांच के लिए भेजे गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य स्टेशनों पर यात्रियों को मिल रहे पानी की शुद्धता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि गत 20 अगस्त से मंडल भर में 2,652 पानी की टंकियों की सफाई और कीटाणुशोधन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 18 सितंबर तक कुल 2,490 टंकियों की सफाई की जा चुकी है, जिनमें ओवरहेड, भूमिगत और पीवीसी टंकियां भी शामिल हैं।

पेयजल की जांच के दौरान रेलवे स्टेशनों के पेयजल बूथ, प्लेटफॉर्म, वाटर कूलर और आरओ सिस्टम की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर संबंधित को तत्काल सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।

 



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