ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के लिए उत्तर प्रदेश ने बड़ा प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है, लेकिन कंपनियों को आकर्षित करने की चुनौती सिर्फ सस्ती जमीन तक सीमित नहीं है। प्रदेश को यह साबित करना होगा कि यहां इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उत्पाद विकास और शोध के लिए उच्चस्तरीय प्रतिभा और मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध है। औद्योगिक विकास विभाग की समीक्षा के मुताबिक इस क्षेत्र में यूपी का मुकाबला बंगलूरू और हैदराबाद से है। नोएडा के बाद अब लखनऊ पर दांव लगाया गया है।
भारत में फरवरी 2025 तक 2100 से अधिक जीसीसी थे और यह बाजार 64.6 अरब डॉलर का था। इस क्षेत्र से 19 लाख से ज्यादा पेशेवर जुड़े थे। विभाग के अध्ययन के अनुसार पिछले तीन-चार वर्षों में नए जीसीसी स्थापित करने में बंगलूरू और हैदराबाद ने बड़ी हिस्सेदारी हासिल की। इसके पीछे प्रतिभा आधार, विकसित इकोसिस्टम और नीतिगत समर्थन प्रमुख कारण बताए गए हैं।
यूपी के पास नोएडा के रूप में मजबूत आधार है। एनसीआर की 490 से अधिक कंपनियों में 150 से ज्यादा नोएडा क्षेत्र में हैं। विभाग ने 169 जीसीसी मैप किए हैं। इनमें अमेजन, ऑप्टम, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट और बार्कलेज जैसी कंपनियां एंकर कंपनियों के तौर पर चिह्नित हैं। इसके बावजूद विभाग ने देश के टॉप-150 जीसीसी को यूपी लाने का अलग लक्ष्य रखा है। इन कंपनियों में 11.68 लाख कर्मचारी हैं।