राम मंदिर में दान की राशि चोरी होने के मामले में सवाल ही सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ट्रस्ट ने अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। वहीं दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों को यह किसने अधिकार दिया कि पिछले करीब दो सप्ताह से संदिग्धों को बैठाकर उनसे पूछताछ कर रहे हैं। यहां तक कि उनको लेकर घरों से रकम भी बरामद की गई थी। वहीं एसआईटी की जांच से पहले कहीं ऐसा तो नहीं कि सबूत मिटाए गए हों। ऐसी आशंका भी बढ़ गई है।
छह जून को चोरी का मामला उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी मामला दबाने में जुट गए थे। गोपनीय तरीके से संदिग्धों को चिह्नित किया गया। फिर उनको पकड़कर बैठा लिया गया। उनसे पूछताछ शुरू की गई और फिर उनकी निशानदेही पर रकम की बरामदगी होने लगी। यह सब इसलिए किया जाता रहा, जिससे असल जिम्मेदार अपनी भूमिका से पल्ला झाड़ सकें। बाद में मामले में एसआईटी गठित की गई, जो जांच कर रही है।
मामले में अब तक केस दर्ज नहीं हुआ। इसको लेकर पूर्व पुलिस अधिकारियों से लेकर कानून के जानकार भी हैरान हैं। वहीं बिना एफआईआर के संदिग्धों को इतने दिनों तक बैठाए रखना भी कानून के इतर है। जिन संदिग्धों को पकड़ा गया, उनमें लवकुश भी शामिल है। उसके दादा ने बताया कि कभी-कभार लवकुश घर आता था, बाकी समय वहीं रहता था। जब से मंदिर में चोरी का प्रकरण हुआ है, तब से ट्रस्ट वाले उसको लेकर आए थे, फिर अपने साथ ले गए। तब से उससे कोई संपर्क नहीं है। इसी तरह अन्य पकड़े गए संदिग्धों की स्थिति है। परिवार वाले भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
