राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी को बचाने की जद्दोजहद चल रही है, ताकि वह बेदाग रह सकें। इसलिए मंथन चल रहा है कि किस पर और किस तरह की कार्रवाई की जाए। एसआईटी को लौटे तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक नहीं पहुंच सकी है।

चोरी का मामला उजागर होने के बाद से ट्रस्ट के पदाधिकारी उसे दबाने में जुटे थे। एसआईटी की टीम ने छह दिन तक अयोध्या में तफ्तीश कर चढ़ावे में हेरफेर के साक्ष्य जुटाए। छानबीन में यह भी सामने आया कि पदाधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर किस तरह रिश्तेदारों व करीबियों को मंदिर प्रबंधन में काम पर रखा हुआ था। इसलिए एसआईटी ने एक तरफ आपराधिक कृत्य करने वालों की सूची तैयार की और दूसरी तरफ लापरवाही बरतने वाले बैंक अधिकारियों व ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम भी रिपोर्ट में शामिल किए। 

इसमें एक बड़ा नाम भी शामिल है, जिनकी ट्रस्ट में भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। सोशल मीडिया पर उनको लेकर तमाम चर्चाएं भी हैं। सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई में देरी की वजह भी इसी नाम को माना जा रहा है। जब तक इस बारे में ऊपर यानी दिल्ली से निर्देश नहीं मिलेंगे, तब तक कोई कार्रवाई संभव नहीं है।

कर्नाटक में कार्यक्रम में शामिल हुए गोपाल राव 

मामले में निर्माण समिति के गोपाल राव चर्चा में हैं। उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि शनिवार देर शाम एसआईटी के लौटने के बाद गोपाल राव कर्नाटक चले गए और वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उसके फोटो और वीडियो भी वायरल हैं। पहले बताया जा रहा था कि एसआईटी ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों के जिले के बाहर जाने पर रोक लगा दी है। 



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