कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। प्रशासन की कार्रवाई के साथ ही विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार को घेरा।




Saharanpur Mosque Demolition: Political temperatures rise; Akhilesh, Mayawati, Owaisi, Chandrashekhar weigh in

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण।
– फोटो : अमर उजाला


मस्जिद के बहाने बसपा सुप्रीमो ने सरकार को घेरा, एक्स पर की पोस्ट 

बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि जिला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे प्रदेश में आए दिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उन्हें ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है, वह ठीक नहीं है। सरकार को ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए इस पर तुरंत रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय जरूर करने चाहिए। इस्लाम मजहब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसे ध्यान में रखकर व भारतीय परंपरा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में जरूरी है।

इसके साथ ही बिना नियम कानून का समुचित अनुपालन किए हुए किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सजा देकर बेघर कर देने की कार्रवाइयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बसपा सरकार की तरह कानूनी राज का व्यवहार जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अंत में लिखा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माननीय न्यायालय भी इस तरफ समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा, लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी जरूरी बनाकर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।

 


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मस्जिद ध्वस्तीकरण।
– फोटो : अमर उजाला


ओवैसी ने की पोस्ट, खुन्नस मिटाने के लिए मस्जिद पर नहीं चला सकते बुलडोजर

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि सहारनपुर कलक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को सुबह पांच बजे ढहा दिया गया। क्या मुसलमानों के लिए अब मजहबी आजादी का सांविधानिक हक भी नहीं बचा है। हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है। मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी।

एक सदी से भी ज्यादा वक्त से वहां लगातार नमाज होती रही है। यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है। यही वक्फ बाय यूजर की बुनियाद है, जिसे कानून में भी मान्यता मिली है। जब एक सदी से ज्यादा अरसे से खुला और लगातार कब्जा रहा है, तो रियासत यह कैसे मान सकती है कि कब्जा कल से शुरू हुआ था। मस्जिद पहले थी, कलक्ट्रेट बाद में आया। कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ होती है, लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं। नजर फेरनी है तो फेर लो, लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते।

 


Saharanpur Mosque Demolition: Political temperatures rise; Akhilesh, Mayawati, Owaisi, Chandrashekhar weigh in

इमारत पर चलता बुलडोजर।
– फोटो : अमर उजाला


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी किया पोस्ट

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी एक्स पर पोस्ट किया। बेहद संतुलित पोस्ट में उन्होंने न सहारनपुर का जिक्र किया और न ही मस्जिद का। उन्होंने लिखा कि सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और उपलब्धि भी। उनका पोस्ट भले ही छोटा है, लेकिन सियासत में इसके बड़े मायने हैं। यह पोस्ट मस्जिद प्रकरण को जोड़कर ही देखी जा रही है।

 


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विरोध जताते इमरान मसूद।
– फोटो : अमर उजाला


हमारे लिए यह काला दिन, हाईकोर्ट में दायर करेंगे रिट : इमरान मसूद

कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जाएंगे और कानूनी प्रक्रिया के तहत मस्जिद का मुआवजा भी लिया जाएगा। धार्मिक स्थल तोड़ा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारे लिए यह काला दिन है। उन्होंने आमजन से धैर्य बनाए रखने की अपील की। सांसद इमरान मसूद एमएलसी शाहनवाज खान के आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद 1911 से पहले की है और आज भी इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। आरोप है कि प्रशासन को तमाम जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई की गई। सांसद के मुताबिक आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था। करीब 22 दिन की अवधि अभी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया।

इमरान मसूद ने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसकी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने इसे काला दिन बताते हुए कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में यही कार्रवाई दूसरों के खिलाफ भी हो सकती है। सरकार ने 2027 के चुनाव पर फोकस करते हुए यह किया है। इस मौके पर एमएलसी शाहनवाज खान, पूर्व महानगर अध्यक्ष वरुण शर्मा, जिला उपाध्यक्ष सरदार चंद्रजीत सिंह निक्कू, हमजा मसूद, डॉ. राजीव अंजुम आदि रहे।

 




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