यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘दाग पर भी मारी बाजी’ की कहानी। इसके अलावा ‘अपने तो अपने होते हैं’ और ‘मंत्रीजी का अटल तारा’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

दाग पर भी मारी बाजी

भगवा दल के संगठन में दोबारा ताजपोशी कराने में सफल रहे एक नेताजी के खिलाफ भले ही ठेकेदार, वकीलों ने लाखों की ठगी का दाग लगाया हो, फिर भी उन्होंने बाजी मार ली। दरअसल, दोबारा ताजपोशी हुई तो वे शिकायती पत्र फिर से मार्केट में घूमने लगे, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत प्रदेश संगठन को भेजे गए थे। इसके साथ नेताजी के उस बैंक खाते का ब्योरा भी सामने आ गया, जिसमें नेताजी ने पैसे लिए थे। ये शिकायतें पिछले साल और इस साल फरवरी में भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे ई-मेल में की गई थीं। इन दिनों फिर ये चर्चा है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बाद भी संगठन में फिर पद मिलना नेताजी के सियासी कौशल का कमाल है।

अपने तो अपने होते हैं

राजधानी में आग क्या लगी, उसकी चिंगारी कई बड़ों तक पहुंच गई। जिनका कोई जुगाड़ नहीं था, वे बेचारे अपने कामकाज पर ताला लगते देखते रह गए। जिनकी ऊपर तक पहुंच थी, उनकी सील लगने के बाद जड़ से उखाड़ दी गई। अब सबकी नजरें एसआईटी की रिपोर्ट पर हैं कि वह क्या सिफारिश करती है? इसमें भी अपनों को बचाने का खेल चल रहा है। रिपोर्ट कहां दब गई, कोई नहीं जानता। लगता है कि मामला ठंडा होने का इंतजार किया जा रहा है।

मंत्रीजी का अटल तारा

मंत्रीजी के आंखों का एक अटल तारा है। मंत्रीजी के वसूली गैंग का वह कभी सरगना था। मामला उच्च स्तर पर पहुंचा तो कह दिया गया कि इस अटल तारे को एसआईटी से कभी भी गिरफ्तार करा लिया जाएगा। उसके बाद यह अटल तारा कुछ समय के लिए अंतरध्यान हो गया। इधर, कुछ दिनों से यह फिर दिखाई दे रहा है। इसकी चर्चा जोरों पर है।



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