इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैंक का पूरा कर्ज चुकाए जाने और दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम होने को देखते हुए वर्ष 2004 के बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने बिजेंद्र जैन की अर्जी पर दिया है।
गाजियाबाद के कोतवाली थाने में याची के खिलाफ 14 जनवरी 2004 को धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोप में दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि आरोपियों ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए खाते खुलवाए आर ऋण दिलाया। इससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ। इस मामले में चल रहे मुकदके की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में याची ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
याची अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने दलील दी कि बैंक की जांच समिति ने 23 अगस्त 2010 को रिपोर्ट दी थी। इसके आधार पर मामले में समझौते का प्रस्ताव पारित किया गया। अदालत को बताया गया कि फर्म का पूरा बकाया ऋण 18 मई 2015 को चुका दिया गया। बैंक के अधिवक्ता ने भी इसकी पुष्टि की।
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि जब बैंक की पूरी ऋण राशि वापस हो चुकी है तो दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम है। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी के खिलाफ पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
