young woman has the right to live as she chooses and to select a partner of her own preference

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वयस्क होने पर व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। कोर्ट ने अस्थि निर्माण परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर युवती की आयु 19 से 21 वर्ष के बीच पाए जाने पर उसे वयस्क माना। इसी के साथ याचिका स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने और याची पति के साथ जाने की अनुमति दे दी।


यह आदेश न्यायमूर्ति अचल सचदेव, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने भदोही निवासी युवती व दो अन्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। याचिका में युवती को कोर्ट में पेश करने और उसे इच्छा के अनुसार रहने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। आदेश पर युवती को नारी निकेतन से कोर्ट के समक्ष हाजिर किया गया था। उसने युवक के साथ जाने की इच्छा जताई। वहीं, युवती के माता-पिता ने कहा कि वह नाबालिग है।

कोर्ट ने पाया कि युवती का नगरपालिका या पंचायत की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने पाया कि अस्थि परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार युवती बालिग है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर वह वयस्क है। इसलिए उसे अपने फैसले स्वयं लेने और अपनी इच्छा के अनुसार साथी के साथ रहने का अधिकार है। 



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